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ंखों में अपनों को खोने का दर्द...लेकिन खौफ ने लगाया जुबां पर ताला
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:43 PM IST
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आजमगढ़। जहरीली शराब ने रौनापार के केवटहिया में 13 और जीयनपुर के अजमतगढ़ में चार मौतों ने कई परिवारों को बेसहारा कर दिया। कई घर तो ऐसे हैं जहां कोई दीपक जलाने वाला भी नहीं बचा है। अपनों को खोने का दर्द उनकी आंखों में आंसू बनकर दिख रहा है, लेकिन जहरीली शराब के काले कारोबारियों के खौफ ने उनकी जुबां पर ताला लगा दिया है। अवैध शराब गांव में ही बिकती है। ये भी पता है कि कहां से आती है, लेकिन कोई भी कुछ कहने को तैयार नहीं है। पुलिस की सांठगांठ के कारण ग्रामीणों का हौसला टूट चुका है और माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
रौनापार के केवटहिया में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत के बाद शुक्रवार शाम से शनिवार दोपहर तक जीयनपुर के अजमत गढ़ में भी जहरीली शराब ने चार लोगों की जान ले ली। शराब कांड के बाद दोनों गांवों में एक बात समान दिखी। परिजनों और ग्रामीणों के अंदर अपनों को खोने का गम तो है, लेकिन जान लेने वाली ये शराब कहां बनती और बिकती है, इस बोलने से साफ बच रहे हैं। कोई कुछ कहने को तैयार होता है तो दूसरा उसे चुप करा देता है। ग्रामीणों के खौफ से ये साफ लगता है कि अवैध शराब के पीछे बड़ा और पावरफुल सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसे राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है। दबी जुबां में ग्रामीणों के बीच हो रही चर्चा से एक बात तो स्पष्ट है कि उन्हें इस बारे में जानकारी तो है, लेकिन पुलिस की मिलीभगत से शराब माफिया का खौफ इतना ज्यादा है कि वो कुछ कह नहीं पा रहे हैं। अजमतगढ़ पहुंचे जीआईजी उदय शंकर जायसवाल के सामने ग्रामीणों ने पुलिस की मिलीभगत को उजागर करते हुए एक पूर्व एसओ पर आरोप भी लगाए। वसूली तक की बात कही, लेकिन शराब माफिया के खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं हुआ।
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रौनापार के केवटहिया में जहरीली शराब से 13 लोगों की मौत के बाद शुक्रवार शाम से शनिवार दोपहर तक जीयनपुर के अजमत गढ़ में भी जहरीली शराब ने चार लोगों की जान ले ली। शराब कांड के बाद दोनों गांवों में एक बात समान दिखी। परिजनों और ग्रामीणों के अंदर अपनों को खोने का गम तो है, लेकिन जान लेने वाली ये शराब कहां बनती और बिकती है, इस बोलने से साफ बच रहे हैं। कोई कुछ कहने को तैयार होता है तो दूसरा उसे चुप करा देता है। ग्रामीणों के खौफ से ये साफ लगता है कि अवैध शराब के पीछे बड़ा और पावरफुल सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसे राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है। दबी जुबां में ग्रामीणों के बीच हो रही चर्चा से एक बात तो स्पष्ट है कि उन्हें इस बारे में जानकारी तो है, लेकिन पुलिस की मिलीभगत से शराब माफिया का खौफ इतना ज्यादा है कि वो कुछ कह नहीं पा रहे हैं। अजमतगढ़ पहुंचे जीआईजी उदय शंकर जायसवाल के सामने ग्रामीणों ने पुलिस की मिलीभगत को उजागर करते हुए एक पूर्व एसओ पर आरोप भी लगाए। वसूली तक की बात कही, लेकिन शराब माफिया के खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं हुआ।
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