फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Cows and buffaloes roaming on the roads, passersby upset

सड़कों पर घूम रहे गाय आैर भैंसे, राहगीर सांसत में

Tue, 10 Aug 2021 10:32 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 10:32 PM IST
विज्ञापन
Cows and buffaloes roaming on the roads, passersby upset
आजमगढ़। शहर की सड़कों व गलियों में गाय-भैंसें घूम रही हैं, जिससे राह चलना दुश्वार हो गया है। केवल छुट्टा पशु ही सड़कों पर नहीं रहते हैं बल्कि टैग लगे पालतू गाय-भैंसों को भी झुंड में देखा जा सकता है। बीच सड़क घूमते पशु प्रशासन की कैटल फ्री मुहिम की खुलेआम खिल्ली उड़ा रहे हैं और अफसर तमाशबीन बने हुुए हैं।
विज्ञापन

छुट्टा पशुओं की बढ़ती तादाद को देखते हुए शहर में एक गोशाला बनाई गई थी। मगर इससे लोगों को राहत मिलती नहीं दिखाई पड़ रही है। अफसरों का तर्क था कि लोग पालतू पशुओं को भी खुला छोड़ देते हैं। इसको रोकने के लिए पशुओं की टैगिंग की व्यवस्था की गई। टैग देखकर आसानी से पशु के मालिक के बारे में पता लगाया जा सकता है। अफसरों की लापरवाही के चलते यह योजना बेमानी साबित हो रही है। टैग लगे पशु सड़कों पर लावारिस घूमते दिख रहे हैं और उनकी कोई धर-पकड़ नहीं है। पहले ऐसे पशुओं को नगर पालिका पकड़ कर ले जाती थी और पशुपालक से जुर्माना वसूल किया जाता था। इस तरह की धरपकड़ बंद होने के कारण छुट्टा पशुओं की तादाद और बढ़ी है। सड़कों पर घूम रहे पशु राहगीरों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। उनके चक्कर में हादसे हो रहे हैं। इतने के बावजूद जिला पशुचिकित्साधिकारी का दावा है कि शहर में एक भी टैग लगे पशु नहीं घूम रहे हैं।
विज्ञापन

सुस्त पड़ गई मुहिम
शहर के लोगों का कहना है कि अब बेसहारा पशु पकड़ने की मुहिम अब पूरी तरह से दम तोड़ने लगी है। अब शहर में कहीं भी लावारिस पशुओं का जमावड़ा देखने को आम ही मिल सकता है। आवारा पशुओं को पकड़ने की मुहिम मात्र कुछ दिनों तक ही चली। लेकिन अब वो भी सुस्त पड़ चुकी है। इस कारण लोगों को भारी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ठंडी सड़क, मुख्य चौक, रैदोपुर, शारदा चौराहा, अराजीबाग व पहाड़पुर समेत अन्य रोड पर अक्सर ही इन पशुओं के कारण राहगीर बुरी तरह से घायल हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पशुओं का जियो टैग किया गया है। ताकि वह कहीं भी रहेंगे तो उनके मालिक की पहचान हो सकेगी। मालिक कहां का रहने वाला है इसकी भी जानकारी मिल जाएगी। जियो टैग से एक यह भी फायदा है कि पशु मालिक उसे लावारिश नहीं छोड़ सकता है। यदि कोई जियो टैग लगा पशु मिलता है तो उसके मालिक का पता भी लगाया जाएगा। साथ ही उसके खिलाफ कार्रवाई की भी प्रक्रिया की जाएगी।
डा. वीरेंद्र, मुख्य चिकित्साधिकारी, आजमगढ़।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed