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कोरोना वैक्सीन तो लगवाई पर नाम और पता गलत दर्ज हो गया
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अहरौला। कोरोना वैक्सीन ने जहां बहुत से लोगों के लिए यूनिटी बढ़ाने का काम किया और करोना से बचाया। वही कईयों के लिए कोरोना वैक्सीन वरदान भी साबित हुई और उनकी कई पुरानी समस्याएं पुरानी तकलीफें भी दूर हो गई। बहुत से लोग वेबसाइट पर नाम न होने से भी परेशान रहे।
कोरोना महामारी पहले चरण में कम लेकिन दूसरे चरण में जमकर तबाही बचाई। जिसका परिणाम हुआ कि बहुत से लोगों ने अपनों केे खोया। किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठा तो किसी के सिर से मां का। इन सबके बीच जब वैक्सीन लगनी शुरू हुई तो पहले लोगों के मन में इसके प्रति भ्रांतियां व्याप्त थी। जिसके कारण बहुत से लोगों ने टीकाकरण कराने से परहेज किया। बहुत से लोग टीका लगवाना चाहते हुए भी वेबसाइट पर नाम न होने के कारण परेशान रहे। इन सबके बीच कुछ लोग जो काफी दिनों से विभिन्न प्रकार की बिमारियों से ग्रसित थे। उन्हें टीकाकरण के बाद इन बीमारियोंव से निजात मिली।
प्रवेश नमन मौर्या ने बताया कि जब कोरोना की पहली वैक्सीन लगी तो हमारे बाएं चेस्ट पर बड़ी सी गिल्टी पहले से थी। जो वैक्सीन लगने के दो महीने बाद अपने आप ही न जाने कहां गायब हो गई और जिसे लेकर हम खुद परेशान रहते थे। वहीं अक्सर पूरे साल एलर्जीकल खांसी हुआ करती थी वह भी एक दम ठीक हो गई है।
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वहीं अंगद सिंह ने बताया कि कोरोना वैक्सीन ने हमें बचा लिया। वैक्सीन लगने के बाद हम कोरोना पॉजिटिव हो गए थे और उस समय चारों तरफ कोरोना से अफरा-तफरी मची हुई थी और सैकड़ों लोग रोज कोरोना से मर रहे थे। उसी समय हमें वैक्सीन लगी कुछ समय बाद हम भी पॉजिटिव हो गये। 14 दिन क्वारंटाइन रहे और टीक हो गए। उधर नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि हम अक्सर सिर दर्द से परेशान रहते थे जिसे अधकपारी की समस्या भी कही जा सकती है। जब से हमें कोरोना वैक्सीन लगी है पहले ही डोज में हमारी यह समस्या पूरी तरह से खत्म हो गई और हमने अब तीसरा बूस्टर डोज भी ले लिया है तो रोहित पांडेय ने कहा कि जब कोविड-19 अपने चरम पर था और टीका लगवाने के लिए अफरा-तफरी मची हुई थी हम हमारे परिवार के कई लोगों का टीकाकरण हुआ था। लेकिन कहीं न कहीं त्रुटि होने से साइट पर नाम दर्ज नहीं हो पाया था। जबकि सभी परिवारों को ऑनलाइन पंजीकरण करवाने के बाद वैक्सीनेशन करवाया गया था। जिससे दूसरी डोज लगवाने में समस्या आई। अवधेश सिंह ने कहा कि जब कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर लंबी लंबी लाइन लगती थी और अफरा-तफरी रहती थी उस समय कई लोगों के नाम वेबसाइट पर दर्द होने से रह गए थे। कहीं फोन नंबर में गड़बड़ी तो कहीं आधार नंबर दर्ज करने में त्रुटि। जिससे लोगों को दूसरा डोज लगवाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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कोरोना महामारी पहले चरण में कम लेकिन दूसरे चरण में जमकर तबाही बचाई। जिसका परिणाम हुआ कि बहुत से लोगों ने अपनों केे खोया। किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठा तो किसी के सिर से मां का। इन सबके बीच जब वैक्सीन लगनी शुरू हुई तो पहले लोगों के मन में इसके प्रति भ्रांतियां व्याप्त थी। जिसके कारण बहुत से लोगों ने टीकाकरण कराने से परहेज किया। बहुत से लोग टीका लगवाना चाहते हुए भी वेबसाइट पर नाम न होने के कारण परेशान रहे। इन सबके बीच कुछ लोग जो काफी दिनों से विभिन्न प्रकार की बिमारियों से ग्रसित थे। उन्हें टीकाकरण के बाद इन बीमारियोंव से निजात मिली।
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प्रवेश नमन मौर्या ने बताया कि जब कोरोना की पहली वैक्सीन लगी तो हमारे बाएं चेस्ट पर बड़ी सी गिल्टी पहले से थी। जो वैक्सीन लगने के दो महीने बाद अपने आप ही न जाने कहां गायब हो गई और जिसे लेकर हम खुद परेशान रहते थे। वहीं अक्सर पूरे साल एलर्जीकल खांसी हुआ करती थी वह भी एक दम ठीक हो गई है।
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वहीं अंगद सिंह ने बताया कि कोरोना वैक्सीन ने हमें बचा लिया। वैक्सीन लगने के बाद हम कोरोना पॉजिटिव हो गए थे और उस समय चारों तरफ कोरोना से अफरा-तफरी मची हुई थी और सैकड़ों लोग रोज कोरोना से मर रहे थे। उसी समय हमें वैक्सीन लगी कुछ समय बाद हम भी पॉजिटिव हो गये। 14 दिन क्वारंटाइन रहे और टीक हो गए। उधर नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि हम अक्सर सिर दर्द से परेशान रहते थे जिसे अधकपारी की समस्या भी कही जा सकती है। जब से हमें कोरोना वैक्सीन लगी है पहले ही डोज में हमारी यह समस्या पूरी तरह से खत्म हो गई और हमने अब तीसरा बूस्टर डोज भी ले लिया है तो रोहित पांडेय ने कहा कि जब कोविड-19 अपने चरम पर था और टीका लगवाने के लिए अफरा-तफरी मची हुई थी हम हमारे परिवार के कई लोगों का टीकाकरण हुआ था। लेकिन कहीं न कहीं त्रुटि होने से साइट पर नाम दर्ज नहीं हो पाया था। जबकि सभी परिवारों को ऑनलाइन पंजीकरण करवाने के बाद वैक्सीनेशन करवाया गया था। जिससे दूसरी डोज लगवाने में समस्या आई। अवधेश सिंह ने कहा कि जब कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर लंबी लंबी लाइन लगती थी और अफरा-तफरी रहती थी उस समय कई लोगों के नाम वेबसाइट पर दर्द होने से रह गए थे। कहीं फोन नंबर में गड़बड़ी तो कहीं आधार नंबर दर्ज करने में त्रुटि। जिससे लोगों को दूसरा डोज लगवाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।