आजमगढ़। जिले में 16 जून को ही परिषदीय स्कूल तो खोल दिए गए, लेकिन बच्चों के लिए न तो किताबें भेजी गई हैं और न ही यूनिफार्म। ऐसी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, इसे लेकर अभिभावक चिंतित हैं। हालत यह है कि बच्चे बिना यूनीफार्म व किताबों के ही स्कूल जा रहे हैं। यूनिफार्र्म, बैग व जूता-मोजा की धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजा जाना है लेकिन पैसा नहीं पहुंचने से अभिभावक इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। जिले में 2702 परिषदीय स्कूलों में करीब सवा चार लाख छात्र पंजीकृत हैं। सभी को निश्शुल्क यूनीफार्म के अलावा जूते, मौजे, बैग निश्शुल्क उपलब्ध कराने का प्रविधान है लेकिन अभी तक इन व्यवस्थाओं के लिए विभाग को शासन से बजट नहीं मिला है। विभाग की माने तो अभी किताबों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। किताबे अभी जिले में नहीं आई हैं। ऐसे में बिना किताब, बैग, यूनीफार्म ही बच्चे स्कूल जाने के लिए विवश हैं। इसके चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अव्यवस्था के बीच कई बच्चे स्कूल जाने तक से कतरा रहे हैं। कोरोना काल में बीते दो सत्र से शिक्षण कार्य वैसे ही सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। अब सभी स्कूल खुले हैं तो बच्चों संसाधन मुहैया कराने को लेकर विभाग लापरवाह बना हुआ है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यूनिफार्म, स्कू़ल बैग, जूते, मौजे वितरण के लिए अभी शासन से बजट नहीं मिला है। जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। किताब वितरण के लिए अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई है। किताब आते ही बच्चों को किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी।