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आजमगढ़: अरसे बाद 150 किसानों को मिली तमसा के बाढ़ से मुक्ति

Tue, 09 Feb 2021 11:17 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 11:17 PM IST
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Azamgarh: 150 farmers got relief from Tamsa floods after a long time
अहरौला ग्राम सभा में नदी पर मनरेगा के तहत बनाए गए बंधे पर कार्य करते श्रमिक।-फाइल फोटो - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़ जिले के अहरौला ग्राम सभा में तमसा नदी के किनारे लगभग 200 बीघे की खेती जो तमसा नदी के पानी की भेंट चढ़ जाती थी। अब वहां फसलें लहलहा रही हैं। मनरेगा से कार्य करा पखनपुर पुल से ग्राम सभा की सीमा तक लगभग 500 मीटर लंबा बाध बना दिया गया है। इससे लगभग 150 किसानों के चेहके पर मुस्कुराहट लौट आई है। अब किसानों की फसल तमसा में आने वाली बाढ़ की भेंट नहीं चढ़ेगी। उनके खेत में फसलें लहलहा रही हैं।
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कोरोना काल में महानगरों में काम बंद होने से पलायित होकर गृह जनपद लौटे श्रमिकों को मनरेगा के तहत कार्य, उपलब्ध कराने से जहां उनकी अजीविका की समस्या कुछ हद तक कम हुई। वहीं, मनरेगा के तहत हुए कई सकारात्मक कार्य भी हुए हैं। इसके सकारात्म परिणाम नगर आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ कार्य हुआ है ब्लाक की अहरौला ग्राम सभा में। यहां तमसा नदी के किनारे लगभग 100 बीघे की खेती ऐसी है जिसे या तो किसान करते नहीं थे। करते भी थे को तमसा नदी का पानी फसलों को बर्बाद कर देता थी। कोरोना काल में महानगर से लौटे श्रमिकों को मनरेगा के तहत कार्य देने की योजना बनाई गई तो निवर्तमान प्रधान कल्पना चौरसिया यहां भी तमसा नदी के किनारे बांध बनाने की प्रस्ताव रखा गया। पखनपुर पुल से ग्राम सभा की सीमा तक कुल 500 मीटर का बाध बनाया जाना था। 90 दिन में 22 श्रमिकों ने कार्य कर चार लाख से ज्यादा की लागत से इस बंधे को तैयार कर लिया। इससे किसानों को तमसा के बाढ़ से मुक्ति मिल गई। किसानों ने गेहूं की खेती भी की है। फसल देख उनके चेहरे खिल उठते हैं। इसके साथ ही किसानों को अपने खेतों तक जाने के लिए रास्ता भी मिल गया है।
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श्रमिकों को भी मिली संजीवनी
अहरौला। लॉकडाउन के दौरान मनरेगा योजना प्रवासी मजदूरों के लिए संजीवनी बनी थी। कोविड-19 के चलते 22 मार्च से पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन घोषित होने पर एक लाख से डज्यादा प्रवासी जनपद में लौट कर आए थे। उनके सामने रोजी और रोटी और परिवार के भरण-पोषण की समस्या थी। मजदूरों को सरकार ने जॉब कार्ड देकर कार्य कराने की घोषणा की थी। बड़े पैमाने पर ग्राम सभाओं में मनरेगा मजदूरों ने मनरेगा के तहत कार्य किया था। प्रवासी मजदूर बृजेश और सर्वेश यादव बताया कि घर वापस आने के बाद पास में न तो पैसे थे न तो परिवार के भरण-पोषण का साधन। मनरेगा में काम करने का अवसर मिला।
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