फूलपुर और ग्रामीण क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को आठवीं मुहर्रम पर जुलूसों और मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान अलम, दुलदुल, ताबूत का जुलूस निकाला गया। कई स्थानों पर अजादारों ने आग पर मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। वहीं, बच्चों ने काले लिबास पहन कर जुलूस में अल अतश, अल अतश की आवाज बुलंद की। मेजवां गांव के इमाम बारगाह में मौलाना वसी मुहम्मद खां, दसमडा गांव में मौलाना अमीर हैदर और सैयद नदीम हैदर जैदी, चमावां में मौलाना जीशान हैदर, इब्राहिमपुर में मौलाना आरजू, फूलपुर कस्बा में शाहिद हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। मौलाना आरजू हुसैन ने कहा कि हज़रत अब्बास बेहद बहादुर थे और इमाम हुसैन के लश्कर के सरदार भी थे। उनकी बहादुरी के किस्से दूर दूर तक मशहूर थे। इतिहास में दर्ज है कि यज़ीदी फौज ने धोखे से नहर पर पानी भरने गए हज़रत अब्बास के बाज़ू कलम कर दिए और वह शहीद हो गए। खपड़ा गांव में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हुसैन हैदर ने कहा कि हजरत अब्बास जंगे मैदान के पास बह रही नहर फरात से पानी लेने गये थे। उनके काफिले में छोटे-छोटे बच्चे प्यास से तड़प रहे थे। यजीदी लश्कर ने जब हजरत अब्बास को पानी लेकर जाते हुए देखा तो हमला कर उन्हें शहीद कर दिया। कर्बला के यह मंजर सुनकर मौजूद अजादार रोने लगे। अंजुमनों ने नौहा और मातम किया। सरायमीर : आठवीं मुहर्रम को ग्रामीण क्षेत्र के निकामुद्दीनपुर, रसूलपुर व ओहदपुर में अलम, ताबूत और दुलदुल का जुलूस निकाला गया। अज़ादारों ने ज़ियारत कर मन्नतें मांगी। जुलूस में अंजुमन रौनक़े अज़ा जलालपुर, अंजुमन इमामिया मखदूम मेहदी व अंजुमन अब्बासिया शाहापुर नौहा मातम करके शहीदाने करबला को खिराजे अकीदत पेश की।