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बंदियों को नहीं मिलेगी कच्ची-जली रोटियां

Thu, 16 Jan 2020 11:09 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 11:09 PM IST
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Automatic machine will make chapati, prisoners will not get raw and burnt
आजमगढ़। जेल में बंदियों को मिलने वाली कच्ची जली रोटियों से छुटकारा मिल जाएगा। जेल प्रशासन जल्द ही रोटी बनाने की इलेक्ट्रानिक रोटी मशीन लगवाने जा रहा है। इस मशीन से एक घंटे में पांच हजार रोटियां बन जाएंगी। यही नहीं भोजन को गरम रखने के लिए इंसुलेटेड बर्तन की भी व्यवस्था की गई है। मशीन और बर्तनों को किस तरह से ऑपरेट किया जाए इसकी बंदियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इस नई व्यवस्था से भोजनालय में काम करने वाले ज्यादातर बंदियों को भी छुट्टी मिल जाएगी।
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जिला जेल के करीब 1248 महिला और पुरुष बंदियों के लिए भोजन भोजनालय में तैयार होता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह व शाम यहां 65 से 70 बंदी काम करते हैं। जेल में प्रतिदिन 26 हजार रोटियां बनाई जाती हैं। रोटी बनाने का जिम्मा तीन से चार बंदियों का होता है। वो रोटी बनाने में माहिर नहीं होते हैं। ऐसे में अक्सर रोटियां कच्ची पक्की या जल जाती है। कच्ची जली रोटी खाने से कई बार बंदी बीमार हो जाते हैं। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन की ओर से जेल में रोटी बनाने के लिए आटोमैटिक इलेक्ट्रानिक मशीन मंगाई गई है जो एक घंटे में करीब पांच हजार रोटियां बनाएगी। इसके अलावा आटा गूंथने की मशीन और भोजन को गरम रखने के लिए अलग से इंसुलेटेड बर्तन मंगाया गया है। दो दिन पूर्व जेल के भोजनालाय में पहुंची इलेक्ट्रानिक मशीन और बर्तन में किस प्रकार से भोजन रखना है, कैसे रोटी बनानी और आटा गूंथना है, इसकी बंदियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। जल्द ही उद्घाटन करते हुए व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
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कम सजा की धारा वाले बंदी करते हैं काम
जेल के भोजनालय में खासतौर से उन्हीं नए बंदियों की ड्यूटी लगाई जाती है जिनके मुकदमे में कम सजा का प्रावधान है। इसमें चोरी की धारा, आर्म्स एक्ट, शराब की तस्करी आदि धाराओं के आरोपी शामिल हैं। जेल के भोजनालय में नई व्यवस्था लागू हो जाने से ना केवल भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बल्कि ऐसे बंदियों को भोजनालय में काम करने से भी मुक्ति मिलेगी।
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बंदियों को गुणवत्तायुक्त और गरम भोजन देने के उद्देश्य सो भोजनालय को अपग्रेड कर दिया गया है। इस व्यवस्था से स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में सुधार आएगा। भोजनालय में काम करने वाले बंदियों की संख्या भी आधी हो जाएगी। बंदियों को ट्रेनिंग दी जा रही। - आरके मिश्रा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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