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Azamgarh News: पहुंच मार्ग नहीं होने से 6 साल से बना पुल अनुपयोगी
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आजमगढ़/ अमिलो। लोक निर्माण विभाग की उदासीनता के कारण मदनपुर- मडहाघाट पर करोड़ों की लागत से तमसा नदी पर बना पुल बेकार पड़ा है। छह साल बाद भी विभाग पुल का पहुंच मार्ग नहीं बनवा पाया। इससे दोनों तरफ के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को प्रतिदिन पांच की जगह 25 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है।
आजमगढ़ जनपद के मुुबारकपुर और मऊ जनपद के मोहम्मदाबाद गोहना विधान सभा के बीच तमसा नदी है। मदनपुर- मड़हाघाट पर पहले दोनों जनपदों के लोग नाव से नदी पार कर आते जाते थे। इससे लोगों को काफी परेशानी होती थी।
लोगों की समस्याओं को देखते हुए तत्कालीन सपा सरकार ने नदी पर पुल निर्माण के लिए वर्ष 2015 में स्वीकृति दी। पुल के निर्माण के लिए 11.45 करोड़ जारी हुए। इसके अलावा तीन करोड़ 57 लाख 13 हजार रुपये एप्रोच मार्ग के लिए स्वीकृत हुए थे।
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पुल निर्माण की जिम्मेदारी सेतु निगम को दी गई। पुल का निर्माण शुरू होने से लोगों को खुशी हुई कि अब उन्हें आने जाने के लिए मुबारकपुर और मोहम्मदाबाद तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा।
चार साल बाद सेतु निगम ने वर्ष 2019 में पुल बनाकर तैयार कर दिया। अब पुल से होकर आने जाने के लिए एप्रोच मार्ग की जरूरत है। एप्रोच मार्ग के निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी मऊ को दी गई है, लेकिन छह साल में लोगों को एप्रोच मार्ग नसीब नहीं हो सका।
आजमगढ़ के तत्कालीन सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने लोगों की समस्याओं के देखते हुए विभाग को एप्रोच मार्ग बनाने के लिए पत्र लिखा था लेकिन कुछ नहीं हुआ। बीते फरवरी माह में विभाग के मंडलीय अधिकारियों ने भी दौरा किया था। इनका भी आश्वासन धरा का धरा रह गया।
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आजमगढ़ जनपद के मुुबारकपुर और मऊ जनपद के मोहम्मदाबाद गोहना विधान सभा के बीच तमसा नदी है। मदनपुर- मड़हाघाट पर पहले दोनों जनपदों के लोग नाव से नदी पार कर आते जाते थे। इससे लोगों को काफी परेशानी होती थी।
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लोगों की समस्याओं को देखते हुए तत्कालीन सपा सरकार ने नदी पर पुल निर्माण के लिए वर्ष 2015 में स्वीकृति दी। पुल के निर्माण के लिए 11.45 करोड़ जारी हुए। इसके अलावा तीन करोड़ 57 लाख 13 हजार रुपये एप्रोच मार्ग के लिए स्वीकृत हुए थे।
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पुल निर्माण की जिम्मेदारी सेतु निगम को दी गई। पुल का निर्माण शुरू होने से लोगों को खुशी हुई कि अब उन्हें आने जाने के लिए मुबारकपुर और मोहम्मदाबाद तक का सफर तय नहीं करना पड़ेगा।
चार साल बाद सेतु निगम ने वर्ष 2019 में पुल बनाकर तैयार कर दिया। अब पुल से होकर आने जाने के लिए एप्रोच मार्ग की जरूरत है। एप्रोच मार्ग के निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी मऊ को दी गई है, लेकिन छह साल में लोगों को एप्रोच मार्ग नसीब नहीं हो सका।
आजमगढ़ के तत्कालीन सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने लोगों की समस्याओं के देखते हुए विभाग को एप्रोच मार्ग बनाने के लिए पत्र लिखा था लेकिन कुछ नहीं हुआ। बीते फरवरी माह में विभाग के मंडलीय अधिकारियों ने भी दौरा किया था। इनका भी आश्वासन धरा का धरा रह गया।