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मत्स्य पालक अधिकारी ने मांगी वीआरएस
Azamgarh
Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
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आजमगढ़(ब्यूरो)। मत्स्य पालक विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने उपनिदेशक आजमगढ़ मंडल पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति की मांग कर डाली।
बता दें कि मत्स्य पालक अभिकरण भी इंदिरा आवास की तर्ज पर गरीब मछुआ परिवारों को आवास के लिए 43 हजार अनुदान देता है। जिले में वित्तीय वर्ष 2011-12 में विभाग ने गरीब 20 मछुआरों के लिए आवासों का आवंटन किया। मत्स्य पालक अधिकारी के अनुसार 19 लाभार्थियों के आवास बन कर तैयार हो गए हैं। 19 लाभार्थी परिवार सरकारी आवास में रह भी रहे हैं। लेकिन एक आवास का निर्माण न होने पर उप निदेशक मत्स्य ने सितंबर माह से नवंबर माह का वेतन रोक दिया। वेतन रोके जाने पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमआर गुप्ता ने बताया कि मत्स्य निरीक्षक के पद पर होते हुए भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पदभार को पूरी निष्ठा से करता आ रहा हूं। लेकिन उपनिदेशक द्वारा मेरा वेतन तीन माह से अवरुद्ध कर दिया है। वेतन न मिलने से मानसिक संतुलन ठीक नहीं रह गया है। उप निदेशक की कार्यपद्धति में राजकीय कार्य करना संभव नहीं रह गया है। इसलिए चार दिसंबर को निदेशक मत्स्य उत्तर प्रदेश लखनऊ को पत्र भेज कर स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति की मांग की है। इस बाबत मत्स्य उप निदेशक जीसी यादव ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष का मछुआ आवास अभी तक पूर्ण न होने पर प्रशासनिक कार्यवाही के तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी के वेतन पर रोक लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण मिलते ही वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।
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बता दें कि मत्स्य पालक अभिकरण भी इंदिरा आवास की तर्ज पर गरीब मछुआ परिवारों को आवास के लिए 43 हजार अनुदान देता है। जिले में वित्तीय वर्ष 2011-12 में विभाग ने गरीब 20 मछुआरों के लिए आवासों का आवंटन किया। मत्स्य पालक अधिकारी के अनुसार 19 लाभार्थियों के आवास बन कर तैयार हो गए हैं। 19 लाभार्थी परिवार सरकारी आवास में रह भी रहे हैं। लेकिन एक आवास का निर्माण न होने पर उप निदेशक मत्स्य ने सितंबर माह से नवंबर माह का वेतन रोक दिया। वेतन रोके जाने पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमआर गुप्ता ने बताया कि मत्स्य निरीक्षक के पद पर होते हुए भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पदभार को पूरी निष्ठा से करता आ रहा हूं। लेकिन उपनिदेशक द्वारा मेरा वेतन तीन माह से अवरुद्ध कर दिया है। वेतन न मिलने से मानसिक संतुलन ठीक नहीं रह गया है। उप निदेशक की कार्यपद्धति में राजकीय कार्य करना संभव नहीं रह गया है। इसलिए चार दिसंबर को निदेशक मत्स्य उत्तर प्रदेश लखनऊ को पत्र भेज कर स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति की मांग की है। इस बाबत मत्स्य उप निदेशक जीसी यादव ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष का मछुआ आवास अभी तक पूर्ण न होने पर प्रशासनिक कार्यवाही के तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी के वेतन पर रोक लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण मिलते ही वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।
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