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सचिवों की हड़ताल से खेती पर मंडराया संकट
Azamgarh
Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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आजमगढ़। जिले की सभी साधन सहकारी समितियों के सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से धान की खेती प्रभावित हो रही है। बारिश के बाद अब किसानों को खाद की जरूरत है, पर समितियों पर ताला लटकने से किसानों का खाद नहीं मिल रहा। इस संकट से जहां किसान हलाकान हैं। वहीं, धान की फसल भी यूरिया के अभाव में प्रभावित होने लगी है। जबकि जिले में 130 मैट्रिक टन खाद उपलब्ध हैं। इसे पीसीएफ व डीसीएफ केन्द्रों से बांटने की तैयारी की जा रही है। खाद ने मिलने के कारण किसानों क प्राइवेट दुकानों से महंगे दाम पर खाद की खरीद करनी पड़ रही है।
जिले में कुल 250 साधन सहकारी समितियां व 24 पीसीएफ व डीसीएफ केंद्र हैं। सभी साधन सहकारी समितियों से किसानों को समय-समय पर सरकारी रेट पर डाई और यूरिया मिलती रहती है। वर्तमान समय में किसानों के धान की खेती परवान चढ़ रही है। मौसम ने भी किसानों का साथ दिया है। ऐसे में किसानों को यूरिया खाद की सख्त आवश्यकता है। वर्तमान समय में अपने वेतन बकाए को लेकर सहकारी समितियों के सचिव प्रदेश स्तरीय हड़ताल पर हैं। इसकी वजह से समितियाें पर ताला लटका हुआ है। किसान प्रतिदिन खाद के लिए समितियों का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन हड़ताल से खाद नहीं मिल रही। किसान प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों पर यूरिया खरीदने को विवश हैं। उसमें भी गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है।
अपर जिला सहकारी अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2005 से ही समितियों के सचिवों को वेतन नहीं मिल रहा। इसकी वजह से हड़ताल पर हैं। डंप 130 मैट्रिक टन खाद को 24 डीसीएफ व पीसीएफ केेंद्र से बांटने की व्यवस्था की जा रही है। डीएपी की एक रैक और आने वाली है।
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पहले आई खाद बंट जाने केबाद दोबारा आई रैक की बांटने की व्यवस्था की जाएगी। किसान बलिहारी, रामधनी, जालिम आदि ने बताया कि सहकारी समितियों से खाद न मिलने से धान की फसलों पर संकट मंडराने लगा है।
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जिले में कुल 250 साधन सहकारी समितियां व 24 पीसीएफ व डीसीएफ केंद्र हैं। सभी साधन सहकारी समितियों से किसानों को समय-समय पर सरकारी रेट पर डाई और यूरिया मिलती रहती है। वर्तमान समय में किसानों के धान की खेती परवान चढ़ रही है। मौसम ने भी किसानों का साथ दिया है। ऐसे में किसानों को यूरिया खाद की सख्त आवश्यकता है। वर्तमान समय में अपने वेतन बकाए को लेकर सहकारी समितियों के सचिव प्रदेश स्तरीय हड़ताल पर हैं। इसकी वजह से समितियाें पर ताला लटका हुआ है। किसान प्रतिदिन खाद के लिए समितियों का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन हड़ताल से खाद नहीं मिल रही। किसान प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों पर यूरिया खरीदने को विवश हैं। उसमें भी गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है।
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अपर जिला सहकारी अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2005 से ही समितियों के सचिवों को वेतन नहीं मिल रहा। इसकी वजह से हड़ताल पर हैं। डंप 130 मैट्रिक टन खाद को 24 डीसीएफ व पीसीएफ केेंद्र से बांटने की व्यवस्था की जा रही है। डीएपी की एक रैक और आने वाली है।
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पहले आई खाद बंट जाने केबाद दोबारा आई रैक की बांटने की व्यवस्था की जाएगी। किसान बलिहारी, रामधनी, जालिम आदि ने बताया कि सहकारी समितियों से खाद न मिलने से धान की फसलों पर संकट मंडराने लगा है।