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जो दैवी गुण पिरो न सके वो विद्या नहीं
Updated Sun, 19 Aug 2018 11:56 PM IST
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लालगंज। विद्या भारती की ओर से संचालित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आजमगढ़ संकुल का आचार्य विकास वर्ग का आयोजन रविवार को संपन्न हुई। दो दिन से चल रहे कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमनाथ सिंह ने किया। आचार्य सम्मेलन में आजमगढ़ और मऊ के विद्यालयों के अध्यापकों ने प्रतिभाग किया।
सम्मेलन में विभिन्न प्रकार के शैक्षिक क्रियाकलापों के विषय पर चर्चा और विषय शिक्षण कराया गया। हिंदी विषय के प्रमुख देवेंद्र प्रताप सिंह प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कूबा और अंग्रेजी विषय के प्रमुख तिलकधारी यादव अवकाश प्राप्त प्रवक्ता श्रीगणेश राय इंटर कॉलेज जौनपुर, विज्ञान विषय के प्रमुख लक्ष्मी नारायण यादव प्रवक्ता श्रीकृष्ण गीता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज लालगंज और गणित विषय के प्रमुख संजय कुमार पाठक ने अपने विषयों के बारे में अपने मत रखे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. प्रभुनाथ सिंह मयंक और विशिष्ट अतिथि कन्हैयालाल चौबे रहे। प्रभुनाथ सिंह मयंक ने कहा कि विद्या के दो स्वरूप है। विद्या के माध्यम से दैवी गुण अगर हमारे अंदर पिरोये नहीं जा रहे हैं तो वह विद्या नहीं है। विद्या की पहचान है कि समूचा विश्व ही हमारा परिवार है। समरसता का पाठ नहीं पढ़ा सके तो वह विद्या कहां रही। विद्या राम, कृष्ण, शिव की रचना करती है। सत्य धर्म, आचरण, परोपकार की शिक्षा दें तो वह शिक्षा है, लेकिन संस्था चलाने के लिए, पैसा कमाने के लिए शिक्षा देना शिक्षा नहीं है। प्रधानाचार्य अजय दुबे, डॉ. विजय बहादुर सिंह, लाल बहादुर सिंह, विजय यादव, भृगुनाथ दीक्षित, दिनेश यादव, अवधेश तिवारी, विजय शंकर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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सम्मेलन में विभिन्न प्रकार के शैक्षिक क्रियाकलापों के विषय पर चर्चा और विषय शिक्षण कराया गया। हिंदी विषय के प्रमुख देवेंद्र प्रताप सिंह प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कूबा और अंग्रेजी विषय के प्रमुख तिलकधारी यादव अवकाश प्राप्त प्रवक्ता श्रीगणेश राय इंटर कॉलेज जौनपुर, विज्ञान विषय के प्रमुख लक्ष्मी नारायण यादव प्रवक्ता श्रीकृष्ण गीता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज लालगंज और गणित विषय के प्रमुख संजय कुमार पाठक ने अपने विषयों के बारे में अपने मत रखे। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. प्रभुनाथ सिंह मयंक और विशिष्ट अतिथि कन्हैयालाल चौबे रहे। प्रभुनाथ सिंह मयंक ने कहा कि विद्या के दो स्वरूप है। विद्या के माध्यम से दैवी गुण अगर हमारे अंदर पिरोये नहीं जा रहे हैं तो वह विद्या नहीं है। विद्या की पहचान है कि समूचा विश्व ही हमारा परिवार है। समरसता का पाठ नहीं पढ़ा सके तो वह विद्या कहां रही। विद्या राम, कृष्ण, शिव की रचना करती है। सत्य धर्म, आचरण, परोपकार की शिक्षा दें तो वह शिक्षा है, लेकिन संस्था चलाने के लिए, पैसा कमाने के लिए शिक्षा देना शिक्षा नहीं है। प्रधानाचार्य अजय दुबे, डॉ. विजय बहादुर सिंह, लाल बहादुर सिंह, विजय यादव, भृगुनाथ दीक्षित, दिनेश यादव, अवधेश तिवारी, विजय शंकर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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