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शिक्षकों की कमी ने बढ़ा दी है छात्राओं की परेशानी
Updated Fri, 13 Jul 2018 12:05 AM IST
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अहरौला/बूढ़नपुर (आजमगढ़)। तहसील बूढ़नपुर अंतर्गत समदी गांव में बालिकाओं के उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्ववर्ती सपा सरकार ने राजकीय बालिका महाविद्यालय की स्थापना कराया था। इस महाविद्यालय में स्नातक कला, विज्ञान और वाणिज्य वर्ग में पठन पाठन की मान्यता है। कंप्यूटर और प्रयोगात्मक लैब काफी व्यवस्थित है। लेकिन पर्याप्त शिक्षकों की अब तक तैनाती नहीं हो सकी है। जिसके चलते यहां प्रवेश लेने वाले छात्राएं अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। करोड़ों की लागत से स्थापित यह महाविद्यालय समाजवादी पार्टी की सरकार के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टर में शामिल रहा है। अपने कार्यकाल के अंतिम समय में सरकार ने महाविद्यालय का लोकार्पण कर दिया। महाविद्यालय को तकनीकी रूप से काफी बेहतर बनाया गया है। लैब आदि की सुविधा होने के बाद भी इसका लाभ यहां पढ़ने वाली छात्राओं को ठीक ढंग से नहीं मिल पा रहा है। कारण यह है कि महाविद्यालय को शुरू हुए दो वर्ष हो गये लेकिन अब तक यहां पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई है। प्रथम सत्र में प्रवेश लेने वाली छात्राएं किसी तरह पढ़ कर दूसरे वर्ष में पहुंच गई और दूसरे सत्र में भी स्नातक प्रथम वर्ष में छात्राओं ने प्रवेश ले लिया है। लेकिन अब तक पठन-पाठन की व्यवस्था ठीक ढंग से शुरू नहीं हो सकी है। यहां पढ़ने वाली छात्राओं का कहना है कि राजकीय महाविद्यालय होने के चलते उन्हें यहां भारी-भरकम फीस तो नहीं देने पड़ रही है, लेकिन मानक के अनुरूप शिक्षक की तैनाती न होने से कक्षाएं ठीक ढंग से अब तक संचालित नहीं हो सकी है। छात्राओं और अभिभावकों का आरोप है कि सरकार शिक्षकों की तैनाती न कर यहां प्रवेश लेने वाली छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
कला वर्ग में मात्र पांच शिक्षक की है तैनाती
अहरौला। राजकीय महाविद्यालय को छात्राओं के लिए स्नातक कला, विज्ञान और कामर्स वर्ग की मान्यता विश्वविद्यालय से मिली हुई है। लेकिन स्नातक कला वर्ग में मात्र पांच शिक्षक हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास और राजनीतिशास्त्र ही अब तक तैनात किये गये है। इसी क्रम में विज्ञान वर्ग और कामर्स वर्ग में मात्र दो-दो शिक्षकों की तैनाती कर काम चलाया जा रहा है।
शिक्षकों की कमी से शासन को लगातार अवगत कराया जा रहा है। यहां तक कि मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा गया है। इसके बाद भी शासन यहां शिक्षकों की तैनाती नहीं कर रहा है। कुछ शिक्षक यहां भेजे गये थे लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में महाविद्यालय के होने के चलते वे यहां से स्थानांतरण करा कर अन्यत्र चले गये। अब तो छात्राएं इस महाविद्यालय में प्रवेश लेने से कतराने लगी है, यदि यहीं स्थिति रहीं तो इस महाविद्यालय का अस्तित्व भी समाप्त हो सकता है।
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डॉ. अजय कुमार मिश्रा, प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, समदी, अहरौला, आजमगढ़।
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कला वर्ग में मात्र पांच शिक्षक की है तैनाती
अहरौला। राजकीय महाविद्यालय को छात्राओं के लिए स्नातक कला, विज्ञान और कामर्स वर्ग की मान्यता विश्वविद्यालय से मिली हुई है। लेकिन स्नातक कला वर्ग में मात्र पांच शिक्षक हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास और राजनीतिशास्त्र ही अब तक तैनात किये गये है। इसी क्रम में विज्ञान वर्ग और कामर्स वर्ग में मात्र दो-दो शिक्षकों की तैनाती कर काम चलाया जा रहा है।
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शिक्षकों की कमी से शासन को लगातार अवगत कराया जा रहा है। यहां तक कि मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा गया है। इसके बाद भी शासन यहां शिक्षकों की तैनाती नहीं कर रहा है। कुछ शिक्षक यहां भेजे गये थे लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में महाविद्यालय के होने के चलते वे यहां से स्थानांतरण करा कर अन्यत्र चले गये। अब तो छात्राएं इस महाविद्यालय में प्रवेश लेने से कतराने लगी है, यदि यहीं स्थिति रहीं तो इस महाविद्यालय का अस्तित्व भी समाप्त हो सकता है।
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डॉ. अजय कुमार मिश्रा, प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, समदी, अहरौला, आजमगढ़।