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भोजपुरी लोकगायन में सौरभ प्रथम, गोविंद द्वितीय और दयानिधि को तृतीय स्थान
Updated Mon, 08 Jan 2018 11:21 PM IST
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आजमगढ़। शारदा चित्रमंदिर में सूत्रधार संस्थान की ओर से आयोजित भोजपुरी लोकगायन प्रतियोगिता में 17 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में सौरभ सम्राट को प्रथम, गोविंद विद्यार्थी को द्वितीय और दयानिधि को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
अभिषेक पंडित के मार्गदर्शन और ममता पंडित, अंगद कश्यप, रितेश रंजन, रामजनम और विनय के देखरेख में रविवार शाम प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। 17 दिसंबर को हुए ऑडिशन में 55 प्रतिभागियों में निर्णायक अमित ओझा और लोकगीत गायक प्यारेलाल ने 17 का चयन किया था। रविवार को प्रतियोगिता दो भाग में आयोजित की गई। पहले भाग में 17 प्रतिभागियों में निर्णायक शशिकांत कुमार और साधना सोनकर ने सात प्रतिभगियों का चयन फाइनल के लिए किया। फाइनल में निर्गुण, चैता, कजरी, पूर्वी, छपरहीया, धोबिया, कहरवा, आल्हा, लाचारी फगुआ की प्रस्तुतियों से प्रतिभागियों ने दर्शकों को सराबोर कर दिया। रंगकर्मी ममता पंडित ने बताया कि भोजपुरी बोली के समृद्धशाली होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस विधा में जन्म से लेकर मृत्यु तक, चैत्र से लेकर फाल्गुन तक, गांव-देहात में होने खेती-किसानी से लेकर गाथा(आल्हा-बिरहा)तक हर प्रकार के गीतों का जो फैलाव है, वो अद्भुत है। फाइनल में सौरभ सम्राट को प्रथम, गोविंद विद्यार्थी को द्वितीय और दयानिधि को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। प्रवीण श्रीवास्तव, तरूण राय और बदरका विद्युत केन्द्र के जेई शत्रुघ्न यादव ने विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन युवा रंगकर्मी हरिकेश मौर्य ने किया।
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अभिषेक पंडित के मार्गदर्शन और ममता पंडित, अंगद कश्यप, रितेश रंजन, रामजनम और विनय के देखरेख में रविवार शाम प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। 17 दिसंबर को हुए ऑडिशन में 55 प्रतिभागियों में निर्णायक अमित ओझा और लोकगीत गायक प्यारेलाल ने 17 का चयन किया था। रविवार को प्रतियोगिता दो भाग में आयोजित की गई। पहले भाग में 17 प्रतिभागियों में निर्णायक शशिकांत कुमार और साधना सोनकर ने सात प्रतिभगियों का चयन फाइनल के लिए किया। फाइनल में निर्गुण, चैता, कजरी, पूर्वी, छपरहीया, धोबिया, कहरवा, आल्हा, लाचारी फगुआ की प्रस्तुतियों से प्रतिभागियों ने दर्शकों को सराबोर कर दिया। रंगकर्मी ममता पंडित ने बताया कि भोजपुरी बोली के समृद्धशाली होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस विधा में जन्म से लेकर मृत्यु तक, चैत्र से लेकर फाल्गुन तक, गांव-देहात में होने खेती-किसानी से लेकर गाथा(आल्हा-बिरहा)तक हर प्रकार के गीतों का जो फैलाव है, वो अद्भुत है। फाइनल में सौरभ सम्राट को प्रथम, गोविंद विद्यार्थी को द्वितीय और दयानिधि को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। प्रवीण श्रीवास्तव, तरूण राय और बदरका विद्युत केन्द्र के जेई शत्रुघ्न यादव ने विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन युवा रंगकर्मी हरिकेश मौर्य ने किया।
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