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कूटरचित अंकपत्र पर बीटीसी कर रहे 9 अभ्यर्थी पकड़े गए
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आजमगढ़। जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान मऊ में बीटीसी बैच 2015 में कूटरचित अंकपत्र के आधार पर नौ अभ्यर्थियों ने प्रवेश पाया था। शिकायत के बाद हुई जांच में आरोप पुष्ट हुआ। इस पर मंडलायुक्त ने मंडल के तीनों जिलों में जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। वहीं मऊ प्रकरण में पटल प्रभारी व सहायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए वेतन वृद्घि रोकने व स्थानांतरण का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही तत्कालीन डायट प्राचार्य के भूमिका की भी जांच कराने का निर्देश दिया।
बीटीसी 2015 बैच के तहत जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान मऊ में प्रवेश लिए कुछ अभ्यर्थियों की शिकायत मंडलायुक्त से की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उक्त अभ्यर्थियों ने कूटरचना कर अपने अंकपत्रों में प्राप्तांक बढ़ा कर प्रवेश लिया। मंडल के तीनों जिलों में ऐसा होने की संभावना को देखते हुए मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करते हुए सुस्पष्ट आख्या देने का निर्देश दिया है। जहानागंज के सेवटा गांव निवासी डॉ. देवेंद्र नाथ पांडेय ने मंडलायुक्त को इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया था कि डायट मऊ में बीटीसी बैच 2015 में फर्जी अंकपत्र के आधार पर प्रवेश दिलाने में तत्कालीन प्राचार्य राजीव रंजन मिश्रा, पटल प्रभारी मोहन चौहान व पटल सहायक शुभम मौर्या ने अंकपत्रों में हेराफेरी किया है। उक्त शिकायत पर तीन सदस्यीय कमेटी से जांच करायी गई। इसमें नौ अभ्यर्थियों प्रमोद कुमार यादव, सीमा यादव, रूबी यादव, रागिनी यादव, सोनम यादव, धर्मेंद्र यादव, अभय कुमार मौर्य, अंजली सिंह एवं गौरव सिंह द्वारा हाईस्कूल, इंटरमीडिएट व बीए के कूटरचित अंक पत्र संलग्न कर बीटीसी बैच 2015 में प्रवेश लिया गया पाया गया। इस पर मंडलायुक्त ने मंडल के तीनों जिलों में जांच के लिए कमेटी का गठन किया और संज्ञान में आये मऊ के प्रकरण में तत्कालीन प्राचार्य के संलिप्तता की जांच कराने का निर्देश दिया। इतना ही नहीं पटल प्रभारी का एक व सहायक का दो वेतनवृद्घि रोकने तथा दोनों का स्थानांतरण करने का निर्देश दिया। 2015 के साथ ही 2016, 2017 व 2018 बैच में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की भी जांच होगी। मंडल स्तर पर जांच के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक एपी वर्मा के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। इसके साथ ही कूटरचना के आधार पर बीटीसी में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के लिए उच्च स्तर पर अवगत करा दिया गया है।
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बीटीसी 2015 बैच के तहत जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान मऊ में प्रवेश लिए कुछ अभ्यर्थियों की शिकायत मंडलायुक्त से की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उक्त अभ्यर्थियों ने कूटरचना कर अपने अंकपत्रों में प्राप्तांक बढ़ा कर प्रवेश लिया। मंडल के तीनों जिलों में ऐसा होने की संभावना को देखते हुए मंडलायुक्त कनक त्रिपाठी ने संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करते हुए सुस्पष्ट आख्या देने का निर्देश दिया है। जहानागंज के सेवटा गांव निवासी डॉ. देवेंद्र नाथ पांडेय ने मंडलायुक्त को इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया था कि डायट मऊ में बीटीसी बैच 2015 में फर्जी अंकपत्र के आधार पर प्रवेश दिलाने में तत्कालीन प्राचार्य राजीव रंजन मिश्रा, पटल प्रभारी मोहन चौहान व पटल सहायक शुभम मौर्या ने अंकपत्रों में हेराफेरी किया है। उक्त शिकायत पर तीन सदस्यीय कमेटी से जांच करायी गई। इसमें नौ अभ्यर्थियों प्रमोद कुमार यादव, सीमा यादव, रूबी यादव, रागिनी यादव, सोनम यादव, धर्मेंद्र यादव, अभय कुमार मौर्य, अंजली सिंह एवं गौरव सिंह द्वारा हाईस्कूल, इंटरमीडिएट व बीए के कूटरचित अंक पत्र संलग्न कर बीटीसी बैच 2015 में प्रवेश लिया गया पाया गया। इस पर मंडलायुक्त ने मंडल के तीनों जिलों में जांच के लिए कमेटी का गठन किया और संज्ञान में आये मऊ के प्रकरण में तत्कालीन प्राचार्य के संलिप्तता की जांच कराने का निर्देश दिया। इतना ही नहीं पटल प्रभारी का एक व सहायक का दो वेतनवृद्घि रोकने तथा दोनों का स्थानांतरण करने का निर्देश दिया। 2015 के साथ ही 2016, 2017 व 2018 बैच में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की भी जांच होगी। मंडल स्तर पर जांच के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक एपी वर्मा के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। इसके साथ ही कूटरचना के आधार पर बीटीसी में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के लिए उच्च स्तर पर अवगत करा दिया गया है।
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