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कृष्णा कालेज तो गिरा...917 लाख की निधि का क्या होगा

Sun, 24 Jun 2018 11:36 PM IST
Updated Sun, 24 Jun 2018 11:36 PM IST
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कृष्णा कालेज तो गिरा...917 लाख की निधि का क्या होगा
कृष्णा कालेज को प्रशासनिक अमले ने ढहा दिया, लेकिन जिस आदेश के क्रम में कालेज को गिराया गया उसी आदेश में विधायक निधि का गबन करने वाले विद्यालयों पर अब तक हुई कार्रवाई का ब्यौरा भी तलब किया गया था, लेकिन यहां कार्रवाई करने में प्रशासन पीछे है। जांच में 22 विद्यालयों की ओर से विधायक एवं सांसद निधि के नाम पर 917 लाख की धनराशि हड़पने की पुष्टि हो चुकी है। तत्कालीन सीडीओ ने वसूली के आदेश भी दे दिए थे। शासकीय अधिवक्ता ने वसूली के साथ ही विद्यालय प्रबंधन, डीआरडीए की दोषी अधिकारी और कर्मचारी पर एफआईआर की संस्तुति भी की थी, लेकिन डीआरडीए भी मामले में कार्रवाई को दबा गया।
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कृष्णा कालेज के ध्वस्तीकरण का विद्यालयों की राजनीति से भी जुड़ा है। एक पक्ष ने लालता यादव के ग्रीनलैंड में बने इस विद्यालय को निशाना बनाया तो लालता यादव ने भी कालेज को जारी की गई विधायक एवं सांसद निधि को लेकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उनकी ओर से हाईकोर्ट में दाखिल की गई पीआईएल पर जिला प्रशासन को लगभग 85 विद्यालयों की जांच के आदेश दिए गए थे। डीएम सुहाल एलवाई के समय कुछ विद्यालयों की जांच हुई थी। इसमें पांच-छह विद्यालयों पर आरसी और एफआईआर की कार्रवाई हुई थी। इन विद्यालयों ने हाईकोर्ट की शरण ले ली। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने कृष्णा कालेज के साथ विधायक निधि के गबन के मामले में विद्यालयों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई इस बारे में भी जानकारी तलब की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बचे विद्यालयों की जांच में तेजी आई। तत्कालीन सीडीओ अभिषेक सिंह ने 24 विद्यालयों को दोषी पाया। इन्हें जवाब देने के लिए नोटिस जारी की गई। आधे लोगों ने जवाब दिया और आधे ने नहीं। जिन्होंने दिया वो भी सही नहीं थी। सीडीओ ने इन पर आरसी आदि कार्रवाई के लिए आदेश परियोजना निदेशक डीआरडीए को दिए थे। इस बीच उनका स्थानांतरण हो गया। उनके जाने के बाद 22 विद्यालयों में कुछ फाइलों को विधिक राय के लिए शासकीय अधिवक्ता के पास भेजा। शासकीय अधिवक्ता ने आरसी जारी करने के साथ ही दोषी डीआरडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की राय दी। इसके बाद विभाग ने अन्य फाइलें उनके पास भेजी ही नहीं।
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पूर्व में जिन विद्यालयों के खिलाफ आरसी जारी की गई थी, उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ले ली है। उनसे वसूली का कोई प्रावधान नहीं है। हाइकोर्ट ने सभी मामलों को एक साथ जोड़ दिया है। प्रशासन की ओर से इसका जवाब दिया जाना है। इसमें वसूली का प्रावधान है, जल्द जवाब दिया जाएगा। 22 अन्य विद्यालयों पर क्या कार्रवाई की गई है। इस बारे में डीआरडीए से जानकारी कर रहा हूं। गड़बड़ी है तो वसूली होगी।
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शिवाकांत द्विवेदी, जिलाधिकारी
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प्रबंधन ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
आजमगढ़। प्रशासन की ओर से कृष्णा इंटर कालेज पर की गई कार्रवाई पर कालेज के प्रबंधक त्रिलोकीनाथ पांडेय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परिसर में कृष्णा इंटर कालेज, डिग्री कालेज के साथ ही अन्य इमारत थी।- उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से आजतक विद्यालय के संबंध में उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं की गई है। इस संबंध में एक मुकदमा 1996 में लालता यादव पुत्र पतिराज यादव के खिलाफ हुआ था। एसडीएम ने 2002 में लालता यादव को नोटिस जारी किया था कि बंधे के दक्षिण में किया गया निर्माण ग्रीनलैंड में है। 2005 में गोवर्धन मंदिर और दो कमरे पर मुकदमा हुआ। 2006 में महाविद्यालय को गिराने का आदेश हुआ। इसके बाद भी आदेश न होने पर भी बिना नोटिस पहले इंटर कालेज को गिराया गया।

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आखिर कैसे होते हैं ग्रीनलैंड में निर्माण
आजमगढ़। ग्रीनलैंड में अभी भी हजारों अवैध निर्माण सीना ताने खड़े हैं। एक हजार से ज्यादा निर्माण को एडीए की ओर से नोटिस जारी की जा चुकी है। इस वर्ष 78 नोटिस जारी किए गए हैं। इसमें कई ऐसी इमारते हैं जिनमें बिना पंजीकरण व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कृष्णा कालेज पर हुई कार्रवाई ने कई और सवालों को जन्म दिया है। ऐसा नहीं है कि ग्रीनलैंड में होने की जानकारी विकास प्राधिकरण को नहीं मिलती है। जारी किए गए नोटिस इसके गवाह है। इसके बाद भी ये निर्माण न पूरे जाते हैं, बल्कि इसमें व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू हो जाती हैं। लगातार एडीए पर धन उगाही के आरोप लगते रहते हैं। इन इमारतों को पूरा होना एडीए पर लगे आरोपों को पुष्ट करते हैं। सवाल ये है कि क्या प्रशासन इतना बौना है कि उनके सामने अवैध निर्माण होता रहता है और प्रशासन इसे रोक नहीं पाता है।
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