Azamgarh: 69 साल के लाल बिहारी 'मृतक' 30 को मनाएंगे 29वां पुनर्जन्म दिवस, 19 साल कागजों में रहे मृत
आजमगढ़ के अमिलो गांव निवासी लाल बिहारी ‘मृतक’ 69 साल की उम्र में अपना 29वां पुनर्जन्म दिवस 30 जून को मनाएंगे। राजस्व कर्मचारियों की एक गलती के कारण लाल बिहारी कागजों में 19 वर्षों तक मृत रहे।
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सुनने में अजीब लग सकता है मगर यह सच है। आजमगढ़ के अमिलो गांव निवासी लाल बिहारी ‘मृतक’ 69 साल की उम्र में अपना 29वां पुनर्जन्म दिवस 30 जून को मनाएंगे। इस समारोह को यादगार बनाने की तैयारी में वह और उनका परिवार लगा हुआ है। उनकी योजना आगामी दिनों में अपनी पत्नी कर्मी देवी से फिर से विवाह रचाने की भी है।
लाल बिहारी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। सात साल की उम्र में वह साड़ी बनाने वाले कारीगरों के साथ काम करने लगे। कम उम्र में काम करने के कारण पढ़ाई-लिखाई नहीं हो सकी। 1975 में जब उनकी उम्र 20 वर्ष की थी तब वो स्वरोजगार के लिए लोन के लिए बैंक पहुंचे। तब ऐसा सच सामने आया जिसे जानकर लाल बिहारी के पैरों तले से जमीन खिसक गई।
जिला मुख्यालय से कोर्ट तक का चक्कर
पता चला कि सरकारी दस्तावेजों में लाल बिहारी की मौत हो चुकी है। सरकारी ऑफिस के कागजों में अपने मृत्यु प्रमाण पत्र होने की बात जान कर दंग रह गए। राजस्व कर्मचारियों की एक गलती के कारण लाल बिहारी को अजीब सी मुश्किल का सामना करना पड़ा।
खुद को कागजातों में जिंदा दिखाने के लिए लाल बिहारी को काफी संघर्ष करना पड़ा। जिला मुख्यालय से कोर्ट तक का चक्कर लगाते-लगाते उनके चप्पल घिस गए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संघर्ष के इस दौर में ही लाल बिहारी ने हाईकोर्ट जाकर अपने नाम के आगे ‘मृतक’ जोड़ लिया। इसके साथ ही उन्होंने मृतक संघ बनाया।
इस संघ में उन्होंने अपने जैसे पीड़ितों को भी जोड़ा। 19 वर्षों तक संघर्ष करने के बाद 30 जून 1994 में लाल बिहारी सरकारी दस्तावेजों में जीवित हुए। बिहारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर यह आवेदन भी किया कि उनके जैसे और लोगों को भी न्याय मिले। हर साल की तरह वह इस साल भी अपना पुनर्जन्म दिवस मनाएंगे। लाल बिहारी मृतक पर एक हिंदी फिल्म भी बन चुकी है।