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Azamgarh News: 6854 समूह गठित, जोड़ी गईं एक लाख से अधिक महिलाएं
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जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 30218 समूहों का गठन कर करीब 4.85 लाख महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसमें अभी तक 6854 समूह गठित कर एक लाख से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। अभियान के तहत पात्र गृहस्थी और अंत्योदय परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर समूहों से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से प्रतिदिन 100 से अधिक समूहों में पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशनकार्ड धारक परिवारों की महिलाओं को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
आने वाले महीनों में समूह गठन की प्रक्रिया को और तेज करने की तैयारी है, ताकि निर्धारित लक्ष्य को समय से पूरा किया जा सके। समूहों से जुड़ने वाली महिलाओं को केवल बचत और ऋण की गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
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उन्हें विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के लिए विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही उन्हें स्वरोजगार के लिए आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
समूहों के गठन के बाद महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरत के अनुसार रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ने के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी।
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सभी विकास खंडों को लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। प्रतिदिन इसकी समीक्षा भी कराई जा रही है। गांव-गांव मुहिम चलाकर महिलाओं को समूह से जोड़ते हुए उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। -डॉ. आराधना त्रिपाठी, डीसी एनआरएलएम।
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इसमें अभी तक 6854 समूह गठित कर एक लाख से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। अभियान के तहत पात्र गृहस्थी और अंत्योदय परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर समूहों से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से प्रतिदिन 100 से अधिक समूहों में पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशनकार्ड धारक परिवारों की महिलाओं को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
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आने वाले महीनों में समूह गठन की प्रक्रिया को और तेज करने की तैयारी है, ताकि निर्धारित लक्ष्य को समय से पूरा किया जा सके। समूहों से जुड़ने वाली महिलाओं को केवल बचत और ऋण की गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
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उन्हें विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के लिए विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही उन्हें स्वरोजगार के लिए आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
समूहों के गठन के बाद महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरत के अनुसार रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ने के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी।
सभी विकास खंडों को लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। प्रतिदिन इसकी समीक्षा भी कराई जा रही है। गांव-गांव मुहिम चलाकर महिलाओं को समूह से जोड़ते हुए उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। -डॉ. आराधना त्रिपाठी, डीसी एनआरएलएम।