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Azamgarh News: कहीं गायब हो गईं तो कहीं धूल फांक रहीं शिकायत पेटिकाएं, फरियादियों की आवाज पर लगा ताला
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जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका नहीं दिखी। संवाद
सरकारी कार्यालयों में फरियादियों की शिकायत सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए लगाई गई शिकायत एवं सुझाव पेटिकाओं की व्यवस्था अब खुद शिकायत का विषय बन गई है। कहीं पेटिकाएं गायब हैं तो कहीं धूल फांक रही हैं।
कई कार्यालयों में इनका कोई अता-पता नहीं है। वहीं, जहां पेटिका लगी मिली, वहां भी उसके नियमित रूप से खोले जाने और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था स्पष्ट नहीं मिली। शिकायत पेटिका पर धूल जमी थी। धूल जमी पेटिका को देखकर ही स्पष्ट हो रहा था कि इसका प्रयोग नहीं होता है।
शिकायत पेटिकाएं लगाने का उद्देश्य उन फरियादियों को अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने का आसान माध्यम उपलब्ध कराना था, जो किसी कारण अपनी समस्या सीधे अधिकारी के सामने नहीं रख पाते।
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समय के साथ ऑनलाइन शिकायत और जनसुनवाई की व्यवस्थाएं बढ़ने के बीच शिकायत पेटिकाओं की ओर विभागों का ध्यान कम होता दिखाई दे रहा है। टीम बुधवार को पड़ताल करने सबसे पहले जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़, विकास भवन, सीएमओ कार्यालय समेत जनपद के ब्लॉक स्तर पर स्थित कार्यालयों की पड़ताल की।
मुख्यालय पर बने कार्यालयों में कहीं भी शिकायत पेटिका नजर नहीं आई। वहीं ब्लॉक स्तर के कुछ कार्यालयों पर शिकायत पेटिका तो मिली लेकिन वह भी बदहाल स्थिति में थी।
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यहां की गई पड़ताल-- -
1- जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका लगने की बात तो कही गई, लेकिन कहीं पर दिखी नहीं। सिर्फ एक कील दिखाई गई, कि यहीं पर लगा था, लेकिन अब कहां है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
2- संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय आजमगढ़ में टीम पहुंची तो यहां पर भी शिकायत पेटिका नहीं दिखी। कर्मचारियों ने बताया कि यहां नोटिस बोर्ड तो लगा है, लेकिन शिकायत पेटिका नहीं है।
3- अतरौलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पड़ताल में एक छोटी शिकायत एवं सुझाव पेटिका मिली, लेकिन उस पर धूल जमा थी। ऐसे में साफ था कि यहां पर सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए शिकायत पेटिका लगा दी गई है।
4- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और विद्युत उपकेंद्र में शिकायत पेटिका नहीं मिली। स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई स्पष्ट माध्यम नहीं दिखा। इसी तरह विद्युत उपकेंद्र पर बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या होने पर उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाना पड़ता है।
5- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौला में शिकायत एवं सुझाव पेटिका लगी मिली, लेकिन वह बदहाल स्थिति में थी। वहीं, खंड शिक्षा कार्यालय में पड़ताल के दौरान शिकायत एवं सुझाव पेटिका दिखाई नहीं दी। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने तत्काल संबंधित कर्मचारियों को शिकायत एवं सुझाव पेटिका लगाने के निर्देश दिए।
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ऑनलाइन व्यवस्था के दौर में पेटिकाएं क्यों हुईं बेकार
सरकारी विभागों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था शुरू होने के बाद शिकायत पेटिकाओं का इस्तेमाल कम हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों और ऐसे लोगों के लिए, जिन्हें ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करने में कठिनाई होती है, शिकायत पेटिका अब भी उपयोगी माध्यम हो सकती है। जिन कार्यालयों में पेटिकाएं लगी हैं, उन्हें नियमित खोला जाना और शिकायतों को दर्ज कर निस्तारण की निगरानी पर भी सवाल हैं। अतरौलिया, पवई और अहरौला की पड़ताल में सामने आई तस्वीर में कई जगह शिकायत पेटिकाएं या तो गायब हैं या फिर बदहाल। ऐसे में फरियादियों की आवाज सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
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धूल की परत में दब गईं फरियादें
आजमगढ़। जिन कार्यालयों में शिकायत पेटिकाएं मौजूद हैं, उनमें से कई का हाल भी बेहतर नहीं है। पेटिकाओं पर धूल की मोटी परत जमा है और यह साफ नहीं है कि आखिरी बार कब इनकी जांच की गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शिकायत पेटिका ही निष्क्रिय है तो फरियादियों की शिकायतें अधिकारियों तक कैसे पहुंचेंगी।
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बोले लोग-- -
फोटो संख्या-- -
सरकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के लिए अगर पेटिका ही नहीं होगी तो आम आदमी अपनी बात लिखित रूप से कहां रखेगा। हर व्यक्ति ऑनलाइन शिकायत करने में सक्षम नहीं होता। कार्यालयों में पेटिका लगाकर उसे नियमित रूप से खोलने और शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।- शंकर राम अतरौलिया।
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फोटो संख्या-- -
बिजली की समस्या को लेकर कई बार कार्यालय जाना पड़ता है। अगर शिकायत पेटिका लगी हो तो हम अपनी समस्या लिखकर जमा कर सकते हैं। लेकिन उपकेंद्र पर ऐसी व्यवस्था नहीं होने से अधिकारी या कर्मचारी से सीधे संपर्क करना पड़ता है। - दीपक यादव, पवई।
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शिकायत एवं सुझाव पेटिका लगाने का उद्देश्य लोगों को अपनी बात रखने का आसान माध्यम देना था। लेकिन कहीं पेटिका है ही नहीं और जहां लगी है, वहां उसकी हालत खराब है। विभाग को पेटिकाओं की नियमित जांच और उनमें आने वाली शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था करनी चाहिए। - श्रीनाथ यादव टोपी, अहरौला।
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ऑनलाइन जनसुनवाई की व्यवस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ऑफलाइन शिकायत व्यवस्था खत्म नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण और तकनीकी रूप से कम सक्षम लोगों के लिए शिकायत पेटिका अब भी उपयोगी है। हर कार्यालय में पेटिका लगाने के साथ उसे नियमित रूप से खोलने और शिकायतों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। - रंजीत सिंह, प्रयास सामाजिक संगठन।
-- -- वर्जन
वर्तमान समय में अधिकारी सुबह 10 से 12 बजे तक जनसुनवाई करते हैं। शिकायत करने के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था हो गई है। फिलहाल सभी विभागों में शिकायत पेटिका लगाना अनिवार्य है। यदि कहीं नहीं लगा है तो संबंधित को निर्देशित किया जाएगा। - संजय चावला, एडीएम प्रशासन आजमगढ़।
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कई कार्यालयों में इनका कोई अता-पता नहीं है। वहीं, जहां पेटिका लगी मिली, वहां भी उसके नियमित रूप से खोले जाने और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था स्पष्ट नहीं मिली। शिकायत पेटिका पर धूल जमी थी। धूल जमी पेटिका को देखकर ही स्पष्ट हो रहा था कि इसका प्रयोग नहीं होता है।
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शिकायत पेटिकाएं लगाने का उद्देश्य उन फरियादियों को अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने का आसान माध्यम उपलब्ध कराना था, जो किसी कारण अपनी समस्या सीधे अधिकारी के सामने नहीं रख पाते।
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समय के साथ ऑनलाइन शिकायत और जनसुनवाई की व्यवस्थाएं बढ़ने के बीच शिकायत पेटिकाओं की ओर विभागों का ध्यान कम होता दिखाई दे रहा है। टीम बुधवार को पड़ताल करने सबसे पहले जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़, विकास भवन, सीएमओ कार्यालय समेत जनपद के ब्लॉक स्तर पर स्थित कार्यालयों की पड़ताल की।
मुख्यालय पर बने कार्यालयों में कहीं भी शिकायत पेटिका नजर नहीं आई। वहीं ब्लॉक स्तर के कुछ कार्यालयों पर शिकायत पेटिका तो मिली लेकिन वह भी बदहाल स्थिति में थी।
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यहां की गई पड़ताल
1- जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका लगने की बात तो कही गई, लेकिन कहीं पर दिखी नहीं। सिर्फ एक कील दिखाई गई, कि यहीं पर लगा था, लेकिन अब कहां है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
2- संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय आजमगढ़ में टीम पहुंची तो यहां पर भी शिकायत पेटिका नहीं दिखी। कर्मचारियों ने बताया कि यहां नोटिस बोर्ड तो लगा है, लेकिन शिकायत पेटिका नहीं है।
3- अतरौलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पड़ताल में एक छोटी शिकायत एवं सुझाव पेटिका मिली, लेकिन उस पर धूल जमा थी। ऐसे में साफ था कि यहां पर सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए शिकायत पेटिका लगा दी गई है।
4- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और विद्युत उपकेंद्र में शिकायत पेटिका नहीं मिली। स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई स्पष्ट माध्यम नहीं दिखा। इसी तरह विद्युत उपकेंद्र पर बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या होने पर उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाना पड़ता है।
5- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौला में शिकायत एवं सुझाव पेटिका लगी मिली, लेकिन वह बदहाल स्थिति में थी। वहीं, खंड शिक्षा कार्यालय में पड़ताल के दौरान शिकायत एवं सुझाव पेटिका दिखाई नहीं दी। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने तत्काल संबंधित कर्मचारियों को शिकायत एवं सुझाव पेटिका लगाने के निर्देश दिए।
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ऑनलाइन व्यवस्था के दौर में पेटिकाएं क्यों हुईं बेकार
सरकारी विभागों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था शुरू होने के बाद शिकायत पेटिकाओं का इस्तेमाल कम हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों और ऐसे लोगों के लिए, जिन्हें ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल करने में कठिनाई होती है, शिकायत पेटिका अब भी उपयोगी माध्यम हो सकती है। जिन कार्यालयों में पेटिकाएं लगी हैं, उन्हें नियमित खोला जाना और शिकायतों को दर्ज कर निस्तारण की निगरानी पर भी सवाल हैं। अतरौलिया, पवई और अहरौला की पड़ताल में सामने आई तस्वीर में कई जगह शिकायत पेटिकाएं या तो गायब हैं या फिर बदहाल। ऐसे में फरियादियों की आवाज सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
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धूल की परत में दब गईं फरियादें
आजमगढ़। जिन कार्यालयों में शिकायत पेटिकाएं मौजूद हैं, उनमें से कई का हाल भी बेहतर नहीं है। पेटिकाओं पर धूल की मोटी परत जमा है और यह साफ नहीं है कि आखिरी बार कब इनकी जांच की गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शिकायत पेटिका ही निष्क्रिय है तो फरियादियों की शिकायतें अधिकारियों तक कैसे पहुंचेंगी।
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बोले लोग
फोटो संख्या
सरकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के लिए अगर पेटिका ही नहीं होगी तो आम आदमी अपनी बात लिखित रूप से कहां रखेगा। हर व्यक्ति ऑनलाइन शिकायत करने में सक्षम नहीं होता। कार्यालयों में पेटिका लगाकर उसे नियमित रूप से खोलने और शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।- शंकर राम अतरौलिया।
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फोटो संख्या
बिजली की समस्या को लेकर कई बार कार्यालय जाना पड़ता है। अगर शिकायत पेटिका लगी हो तो हम अपनी समस्या लिखकर जमा कर सकते हैं। लेकिन उपकेंद्र पर ऐसी व्यवस्था नहीं होने से अधिकारी या कर्मचारी से सीधे संपर्क करना पड़ता है। - दीपक यादव, पवई।
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शिकायत एवं सुझाव पेटिका लगाने का उद्देश्य लोगों को अपनी बात रखने का आसान माध्यम देना था। लेकिन कहीं पेटिका है ही नहीं और जहां लगी है, वहां उसकी हालत खराब है। विभाग को पेटिकाओं की नियमित जांच और उनमें आने वाली शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था करनी चाहिए। - श्रीनाथ यादव टोपी, अहरौला।
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ऑनलाइन जनसुनवाई की व्यवस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ऑफलाइन शिकायत व्यवस्था खत्म नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण और तकनीकी रूप से कम सक्षम लोगों के लिए शिकायत पेटिका अब भी उपयोगी है। हर कार्यालय में पेटिका लगाने के साथ उसे नियमित रूप से खोलने और शिकायतों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। - रंजीत सिंह, प्रयास सामाजिक संगठन।
वर्तमान समय में अधिकारी सुबह 10 से 12 बजे तक जनसुनवाई करते हैं। शिकायत करने के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था हो गई है। फिलहाल सभी विभागों में शिकायत पेटिका लगाना अनिवार्य है। यदि कहीं नहीं लगा है तो संबंधित को निर्देशित किया जाएगा। - संजय चावला, एडीएम प्रशासन आजमगढ़।

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका नहीं दिखी। संवाद

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका नहीं दिखी। संवाद

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका नहीं दिखी। संवाद

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में शिकायत पेटिका नहीं दिखी। संवाद