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विकास प्राधिकरण में पुराना है पैसे का खेल
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:53 PM IST
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आजमगढ़। जिले के सुनियोजित विकास के लिए गठित आजमगढ़ विकास प्राधिकरण जिले में विकास का कोई कार्य तो करा नहीं सका अलबत्ता उसके द्वारा पैसे का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। प्राधिकरण में जारी पैसे का यह खेल कोई नया नहीं है। क्योंकि पूर्व में विभाग के दो जेई पैसे के लेनदेन को लेकर थाने की हवा भी खा चुके हैं। इसके बाद भी एडीए की भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगी।
2008 में बना आजमगढ़ विकास प्राधिकरण जनपद का सुनियोजित विकास करने बजाए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जेबें भरने में लगे रहे। तत्कालीन सचिव ने जब ग्रीनलैंड और कृषि क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करना शुरू किया तो विभागीय कर्मचारियों और अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया। इस अभियान के तहत उन्होंने नगर के रैदोपुर चौराहा स्थित ग्रीन लैंड में बने एक होटल संचालक को नोटिस जारी कर अपने कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। कार्यालय पहुंचे उक्त होटल संचालक ने विभाग के दो जेई पर पैसा लेने का आरोप लगाया। इस पर तत्कालीन एडीए सचिव ने तत्काल दोनों जेई को सिधारी पुलिस के हवाले कर दिया। लेकिन उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया बल्कि कुछ देर बाद दोनों को छुड़वा दिया। इसके बाद उन्होंने एक जेई से उसके सारे अधिकार छीन लिए और एक जेई को ही सारा कार्य सौंप दिया। लेकिन कुछ दिन बाद ही एडीए सचिव का स्थानांतरण हो गया। साथ ही विकास प्राधिकरण का कार्य देख रहे जेई का भी गैर जनपद स्थानांतरण हो गया। इसके बाद विभाग का सारा कार्य अधिकार छीने गए जेई पर आ गया। दोबारा चार्ज मिलने के बाद उक्त जेई ने फिर से पुराना खेल शुरू किया। तत्कालीन एडीए सचिव द्वारा उसे थाने में बिठाने का भी कोई असर नहीं हुआ। कहने को तो प्राधिकरण में स्थाई सचिव बाबू सिंह और एई बीडी राम की तैनाती है लेकिन कार्यालय की पूरी गतिविधि उक्त जेई के इशारे पर ही संचालित होती है। जनपद में हो रहे अवैध निर्माणों के संबंध में पूछे जाने पर एडीए सचिव जेई पर ठीकरा फोड़ते हैं। जबकि जेई का कहना है कि निर्माण रोकना मेरी जिम्मेदारी है लेकिन कार्रवाई करना सचिव और एई का कार्य है। चाहे कुछ भी हो लेकिन दोनों के बीच शहर का कबाड़ा हो रहा है। इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
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2008 में बना आजमगढ़ विकास प्राधिकरण जनपद का सुनियोजित विकास करने बजाए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जेबें भरने में लगे रहे। तत्कालीन सचिव ने जब ग्रीनलैंड और कृषि क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करना शुरू किया तो विभागीय कर्मचारियों और अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया। इस अभियान के तहत उन्होंने नगर के रैदोपुर चौराहा स्थित ग्रीन लैंड में बने एक होटल संचालक को नोटिस जारी कर अपने कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। कार्यालय पहुंचे उक्त होटल संचालक ने विभाग के दो जेई पर पैसा लेने का आरोप लगाया। इस पर तत्कालीन एडीए सचिव ने तत्काल दोनों जेई को सिधारी पुलिस के हवाले कर दिया। लेकिन उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया बल्कि कुछ देर बाद दोनों को छुड़वा दिया। इसके बाद उन्होंने एक जेई से उसके सारे अधिकार छीन लिए और एक जेई को ही सारा कार्य सौंप दिया। लेकिन कुछ दिन बाद ही एडीए सचिव का स्थानांतरण हो गया। साथ ही विकास प्राधिकरण का कार्य देख रहे जेई का भी गैर जनपद स्थानांतरण हो गया। इसके बाद विभाग का सारा कार्य अधिकार छीने गए जेई पर आ गया। दोबारा चार्ज मिलने के बाद उक्त जेई ने फिर से पुराना खेल शुरू किया। तत्कालीन एडीए सचिव द्वारा उसे थाने में बिठाने का भी कोई असर नहीं हुआ। कहने को तो प्राधिकरण में स्थाई सचिव बाबू सिंह और एई बीडी राम की तैनाती है लेकिन कार्यालय की पूरी गतिविधि उक्त जेई के इशारे पर ही संचालित होती है। जनपद में हो रहे अवैध निर्माणों के संबंध में पूछे जाने पर एडीए सचिव जेई पर ठीकरा फोड़ते हैं। जबकि जेई का कहना है कि निर्माण रोकना मेरी जिम्मेदारी है लेकिन कार्रवाई करना सचिव और एई का कार्य है। चाहे कुछ भी हो लेकिन दोनों के बीच शहर का कबाड़ा हो रहा है। इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
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