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डिप्टी डायरेक्टर की सेलरी उठा रहे थे 43 सेक्रेटरी
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आजमगढ़। गलत पे स्केल के आधार पर पूरे प्रदेश में हजारों सेक्रेटरी डिप्टी डायरेक्टर के स्तर का वेतनमान ले रहे थे। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की पेंशन स्वीकृत करने में जब कोषागार ने आब्जेक्शन लगाया तो इसकी हर जिलों में जांच कराई गई। जनपद में जांच के दौरान 43 सेक्रेटरी गलत पे स्केल पर वेतनमान लेते हुए पाए गए। इस पर अब उनसे अधिक लिए गए वेतन की वसूली का निर्देश दिया गया है।
यह मामला सिर्फ अपने जनपद का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। जब गलत पे स्केल लगाकर सेक्रेटरी को डिप्टी डायरेक्टर रैंक का वेतनमान दे दिया गया। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब इस तरह से वेतनमान ले रहे सेक्रेटरी सेवानिवृत्त हुए और उनकी पेंशन स्वीकृत करने के लिए उनकी फाइल को कोषागार में भेजा गया। मुख्य कोषाधिकारी की ओर से इसमें आब्जेक्शन लगाकर उसे वापस कर दिया गया। ऐसे ही तीन सेक्रेटरी की पेंशन पत्रावली पर प्रभारी डीपीआरओ रहे जिला विकास अधिकारी रविशंकर राय भी असहमति जता चुके थे। जिसका परिणाम हुआ पूरे प्रदेश में जांच के निर्देश पर डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में सीटीओ और डीपीआरओ की एक टीम बनाकर जांच करने का निर्देश दिया। जांच में 43 सेक्रेटरी ऐसे मिले जो डिप्टी डायरेक्टर पद के समान वेतन लेते हुए मिले थे। इसी बीत सेक्रेटरी हाईकोर्ट चले गए लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली। जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन के निर्देश पर डीएम की ओर से सभी से अधिक ली गई धनराशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया है।
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गलत पे स्केल लगने के कारण यह लोग 2014 से ही डिप्टी डायरेक्टर पद के समान वेतन प्राप्त कर रहे थे। जिले में ऐसे 43 सेक्रेटरी जांच में पाए गए। अब इनसे अधिक ली गई धनराशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया है।
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आनंद कुमार शुक्ला, सीडीओ।
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यह मामला सिर्फ अपने जनपद का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का है। जब गलत पे स्केल लगाकर सेक्रेटरी को डिप्टी डायरेक्टर रैंक का वेतनमान दे दिया गया। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब इस तरह से वेतनमान ले रहे सेक्रेटरी सेवानिवृत्त हुए और उनकी पेंशन स्वीकृत करने के लिए उनकी फाइल को कोषागार में भेजा गया। मुख्य कोषाधिकारी की ओर से इसमें आब्जेक्शन लगाकर उसे वापस कर दिया गया। ऐसे ही तीन सेक्रेटरी की पेंशन पत्रावली पर प्रभारी डीपीआरओ रहे जिला विकास अधिकारी रविशंकर राय भी असहमति जता चुके थे। जिसका परिणाम हुआ पूरे प्रदेश में जांच के निर्देश पर डीएम ने सीडीओ की अध्यक्षता में सीटीओ और डीपीआरओ की एक टीम बनाकर जांच करने का निर्देश दिया। जांच में 43 सेक्रेटरी ऐसे मिले जो डिप्टी डायरेक्टर पद के समान वेतन लेते हुए मिले थे। इसी बीत सेक्रेटरी हाईकोर्ट चले गए लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली। जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन के निर्देश पर डीएम की ओर से सभी से अधिक ली गई धनराशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया है।
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गलत पे स्केल लगने के कारण यह लोग 2014 से ही डिप्टी डायरेक्टर पद के समान वेतन प्राप्त कर रहे थे। जिले में ऐसे 43 सेक्रेटरी जांच में पाए गए। अब इनसे अधिक ली गई धनराशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया गया है।
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आनंद कुमार शुक्ला, सीडीओ।