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बुनियादी समस्याएं हुई हवा, पार्टी आधार पर लड़ा जा रहा चुनाव
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:02 AM IST
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आजमगढ़। स्थानीय मुद्दों को लेकर लड़ा जाने वाला नगर निकाय चुनाव इस बाद पार्टियों का चुनाव बन गया है। कोई भी प्रत्याशी स्थानीय समस्याओं पर बात नहीं कर रहा है। हर किसी को पार्टी द्वारा किए गए कार्यों के दम पर जीत हासिल करने का भरोसा है।
नगर पालिका और नगर निकायों की सबसे बड़ी समस्या नाली, सड़क, बिजली, पानी और प्रकाश की है। पहले इन्हीं स्थानीय समस्याओं को लेकर नगर निकाय चुनाव लड़े जाते थे। चुनाव किसी पार्टी के सिंबल पर नहीं लड़े जाते थे। जिसके कारण प्रत्याशी भी स्थानीय मुद्दों पर लोगों से चर्चा कर उसका समाधान करने का वादा करते थे। आम जनमानस उनके वादों पर भरोसा करके उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनता था। लेकिन इस बार सभी पार्टियों ने अपने-अपने सिंबल पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। जिसके कारण प्रत्याशी जातीय समीकरण के साथ ही पार्टी के द्वारा किए गए कार्यों को जनता तक पहुंचाने में जुटे हैं। वह आम लोगों को यह नहीं बता रहे हैं कि उनके मुहल्ले की जो समस्या है जीतने के बाद वह उस समस्या का हल निकालेंगे।
नगर के अठवरिया मैदान निवासी ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि अब नगरपालिका का चुनाव पार्टी स्तर का हो चुका हथै। क्योंकि सभी पार्टियों ने अपने सिंबल पर प्रत्याशी उतारे हैं। नगर की अनेक गलियां ऐसी हैं जिनमें पैदल गुजरना भी मुश्किल है। इस तरफ किसी प्रत्याशी का ध्यान नहीं है।
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आराजीबाग निवासी सौरभ डालमियां ने कहा कि नगर क्षेत्र में स्थानीय समस्याएं ज्यादा हैं। लेकिन कोई भी प्रत्याशी इन समस्याओं के निदान का वादा नहीं कर रहा है। हर मुहल्ले में सूअर और बंदरों का आतंक है, गलियां कूड़ों से पटी हैं इनसे निजात के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है।
ब्रह्मस्थान मुहल्ला निवासी अविनाश यादव ने कहा कि मुद्दे तो बहुत हैं लेकिन सभी पाटियों के प्रत्याशी इन मुद्दों को भूलकर पार्टी की बात कर रहे हैं। जबकि नगर की जनता विकास चाहती है और विकास के नाम पर ही वोट करेगी। लेकिन यह मुद्दे प्रत्याशियों के लिए गौड़ हो गए हैं।
हरिऔध नगर मुहल्ला निवासी राजेश सिंह ने कहा कि नगर के कई मुहल्ले ऐसे हैं जहां गाड़ियों के जाने की भी व्यवस्था नहीं है। अगर कोई घटना होती है तो फायर ब्रिगेड भी नहीं जा सकता है। नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। इस तरफ किसी प्रत्याशी का ध्यान नहीं है।
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नगर पालिका और नगर निकायों की सबसे बड़ी समस्या नाली, सड़क, बिजली, पानी और प्रकाश की है। पहले इन्हीं स्थानीय समस्याओं को लेकर नगर निकाय चुनाव लड़े जाते थे। चुनाव किसी पार्टी के सिंबल पर नहीं लड़े जाते थे। जिसके कारण प्रत्याशी भी स्थानीय मुद्दों पर लोगों से चर्चा कर उसका समाधान करने का वादा करते थे। आम जनमानस उनके वादों पर भरोसा करके उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनता था। लेकिन इस बार सभी पार्टियों ने अपने-अपने सिंबल पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। जिसके कारण प्रत्याशी जातीय समीकरण के साथ ही पार्टी के द्वारा किए गए कार्यों को जनता तक पहुंचाने में जुटे हैं। वह आम लोगों को यह नहीं बता रहे हैं कि उनके मुहल्ले की जो समस्या है जीतने के बाद वह उस समस्या का हल निकालेंगे।
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नगर के अठवरिया मैदान निवासी ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि अब नगरपालिका का चुनाव पार्टी स्तर का हो चुका हथै। क्योंकि सभी पार्टियों ने अपने सिंबल पर प्रत्याशी उतारे हैं। नगर की अनेक गलियां ऐसी हैं जिनमें पैदल गुजरना भी मुश्किल है। इस तरफ किसी प्रत्याशी का ध्यान नहीं है।
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आराजीबाग निवासी सौरभ डालमियां ने कहा कि नगर क्षेत्र में स्थानीय समस्याएं ज्यादा हैं। लेकिन कोई भी प्रत्याशी इन समस्याओं के निदान का वादा नहीं कर रहा है। हर मुहल्ले में सूअर और बंदरों का आतंक है, गलियां कूड़ों से पटी हैं इनसे निजात के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है।
ब्रह्मस्थान मुहल्ला निवासी अविनाश यादव ने कहा कि मुद्दे तो बहुत हैं लेकिन सभी पाटियों के प्रत्याशी इन मुद्दों को भूलकर पार्टी की बात कर रहे हैं। जबकि नगर की जनता विकास चाहती है और विकास के नाम पर ही वोट करेगी। लेकिन यह मुद्दे प्रत्याशियों के लिए गौड़ हो गए हैं।
हरिऔध नगर मुहल्ला निवासी राजेश सिंह ने कहा कि नगर के कई मुहल्ले ऐसे हैं जहां गाड़ियों के जाने की भी व्यवस्था नहीं है। अगर कोई घटना होती है तो फायर ब्रिगेड भी नहीं जा सकता है। नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। इस तरफ किसी प्रत्याशी का ध्यान नहीं है।