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नियुक्ति निरस्त करने के आदेश, फिर भी जारी किया जाता रहा वेतन
Updated Fri, 03 Nov 2017 11:22 PM IST
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आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। रोजाना फर्जीवाड़े से संबंधित नए मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामले में अधिकारियों की मिलीभगत से एक ऐसे शिक्षिका को वेतन दिया जाता रहा है, जिनके शैक्षिक अभिलेख अवैध पाए जाने पर नियुक्ति रद करने के आदेश पूर्व समाज कल्याण अधिकारी 2002 में ही दे चुके थे।
मामला निजामाबाद तहसील के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय का है। वर्ष 2002 में समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में तैनात शिक्षकों का सत्यापन हुई तो पता चला कि यहां तैनात शिक्षिका आशा देवी पत्नी हरीलाल की ओर से लगाई गई डिग्री विभाग में मान्य ही नहीं है। शिक्षिका की ओर से हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की डिग्री लगाई गई थी, जिसे बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अमान्य करार दिया गया था। रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल ने प्रबंधक को आदेश जारी किया कि संबंधित डिग्री मान्य नहीं है, इसलिए शिक्षिका को तुरंत विद्यालय से विरत कर सूचित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि भविष्य में इन्हें किसी प्रकार का देय भुगतान करना संभव नहीं होगा। आदेश से निदेशक समाज कल्याण और उपनिदेशक समाज कल्याण को भी अवगत करा दिया गया था।
तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल के यहां से स्थानांतरण के बाद आरोपी शिक्षिका के पति जो कि विद्यालय के प्रबंधक भी थे, उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से वेतन फिर से शुरू करा दिया, जो लगातार जारी है। मामले में वर्ष अगस्त 2016 में मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह की ओर से फिर जिलाधिकारी से शिकायत की गई। अधिकारियों की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जाता रहा।
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मामला निजामाबाद तहसील के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय का है। वर्ष 2002 में समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में तैनात शिक्षकों का सत्यापन हुई तो पता चला कि यहां तैनात शिक्षिका आशा देवी पत्नी हरीलाल की ओर से लगाई गई डिग्री विभाग में मान्य ही नहीं है। शिक्षिका की ओर से हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद की डिग्री लगाई गई थी, जिसे बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अमान्य करार दिया गया था। रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल ने प्रबंधक को आदेश जारी किया कि संबंधित डिग्री मान्य नहीं है, इसलिए शिक्षिका को तुरंत विद्यालय से विरत कर सूचित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि भविष्य में इन्हें किसी प्रकार का देय भुगतान करना संभव नहीं होगा। आदेश से निदेशक समाज कल्याण और उपनिदेशक समाज कल्याण को भी अवगत करा दिया गया था।
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तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी आरपी शुक्ल के यहां से स्थानांतरण के बाद आरोपी शिक्षिका के पति जो कि विद्यालय के प्रबंधक भी थे, उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से वेतन फिर से शुरू करा दिया, जो लगातार जारी है। मामले में वर्ष अगस्त 2016 में मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह की ओर से फिर जिलाधिकारी से शिकायत की गई। अधिकारियों की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जाता रहा।
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