सठियांव। चीनी मिल सठियांव के आसपास के किसानों के लिए रसायनयुक्त पानी परेशानी का सबब बना हुआ है। किसानों की रबी की फसल तो बर्बाद हुई ही, अब खरीफ के सीजन में 400 एकड़ धान की फसल भी बर्बाद हो गई है। इसे लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीर गहरी होती नजर आ रही है। वहीं बारिश अधिक होने से चीनी मिल का केमिकलयुक्त पानी किसानों के घरों तक पहुंच गया है। इससे गंभीर बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। किसानों ने कई बार इस समस्या से अवगत कराया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
चीनी मिल सठियांव गन्ना किसानों के लिए जहां वरदान साबित हो रही है वहीं मिल से सटे किसानों को अपनी खेती करना कठिन होता जा रहा है। चीनी मिल के डिस्टलरी प्लांट से निकला दूषित पानी जहां दुर्गंध का पर्याय बना हुआ है वहीं यह जहरीला पानी फसलों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।इसका समाधान कौन करेगा उन्हें पता नहीं है। असोना, हरैया, बस्ती, देवरिया खालसा, सुराई, संग्रामपुर व कादीपुर आदि के लगभग 25 हजार की आबादी वाले गांव के लोग भुखमरी के कगार पर खड़े हैं। गांव के पूर्व प्रधान व किसान बाके यादव, करन यादव, लालचंद व प्यारे ने कहा कि किसानों की हितैषी होने का दम तो सभी भरते हैं लेकिन हम किसानों का कोई पुरसा हाल नहीं हैं। वहीं हैंडपंप से दूषित पानी निकल रहा है। जिससे गांव के लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। वहीं इस समस्या को लेकर मुबारकपुर विधान सभा के समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व जिलाध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में मिल के सचिव से मुलाकात कर जल निकास की समुचित व्यवस्था के साथ बर्बाद फसल के मुआवजे की मांग की लेकिन एक पखवाड़ा बीत गया फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

सठियांव मिल से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी आस-पास के खेती की जमीन में फैला।- फोटो : AZAMGARH