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होनी थी पुर्नमतगणना, आ गया स्थगन आदेश
Updated Thu, 22 Feb 2018 12:25 AM IST
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लाटघाट। अजमतगढ़ विकास खंड के पारण कुंडा गांव में बुधवार को पुर्नमतगणना का कार्य होना था। लेकिन उपनिर्वाचन को देखते हुए पुर्नमतगणना के कार्य को स्थगित कर दिया गया। गांव ग्राम पंचायत के चुनाव में ग्राम प्रधान पद पर शिवचंद सिंह को 554 वोट और दूसरे स्थान पर अनिल सिंह को 539 वोट मिले थे। इसमें 27 मत अवैध पाए गए थे। मतगणना के बाद शिवचंद सिंह को विजेता घोषित कर दिया गया। इस पर अनिल सिंह ने खुद को एक वोट से हारने और अपने 19 मत को अवैध घोषित करने का आरोप लगाते हुए पुर्नमतगणना की मांग की। इसे लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में भी अपील दायर की। हाईकोर्ट ने एसडीएम सगड़ी को जल्द मामले के निस्तारण का आदेश दिया। इस पर एसडीएम सगड़ी ने 21 फरवरी को पुर्न मतगणना की तिथि निर्धारित की थी। लेकिन उपनिर्वाचन के कारण पुर्नमतगणना को स्थगित कर दिया गया। अब उपनिर्वाचन के बाद दूसरी तिथि घोषित कर पुर्नमतगणना की जाएगी। ब्यूरो
निर्मित शौचालयों की नहीं हुई जीयो टैगिंग
तहबरपुर। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह द्वारा कराई गई शौचालयो की जांच में तहबरपुर विकास खंड के आठ गांवों कोल्हपुर, लखनूपुर, बसही जरमजेपुर, हरैया, मधसिया, चकबारी, जमालपुर काजी, धनियाकुंडी गांव में अपूर्ण शौचालय पाए गए थे। जिससे ग्राम प्रधानों और सचिवों में हड़कंप मचा हुआ है। सहायक बिकास अधिकारी पंचायत ओम प्रकाश यादव ने बताया कि यहां कोई शौचालय घोटाला नहीं है। जांच में जिन गांवों को चिन्हित किया गया है, वहां सभी शौचालय पूर्ण रूप से बन चुके हैं। सभी शौचालय वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में बने हैं। उस समय कोई बेस लाईन नहीं थी। बेस लाईन वर्ष17-18 के अंतिम चरण में आई है। इसल िए शौचालयों की एमआईएस डाटा के साथ जीओ टैगिंग नहीं हो सकी। जिसके कारण जांच में उन्हें अपूर्ण मान लिया गया। ब्यूरो
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निर्मित शौचालयों की नहीं हुई जीयो टैगिंग
तहबरपुर। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह द्वारा कराई गई शौचालयो की जांच में तहबरपुर विकास खंड के आठ गांवों कोल्हपुर, लखनूपुर, बसही जरमजेपुर, हरैया, मधसिया, चकबारी, जमालपुर काजी, धनियाकुंडी गांव में अपूर्ण शौचालय पाए गए थे। जिससे ग्राम प्रधानों और सचिवों में हड़कंप मचा हुआ है। सहायक बिकास अधिकारी पंचायत ओम प्रकाश यादव ने बताया कि यहां कोई शौचालय घोटाला नहीं है। जांच में जिन गांवों को चिन्हित किया गया है, वहां सभी शौचालय पूर्ण रूप से बन चुके हैं। सभी शौचालय वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में बने हैं। उस समय कोई बेस लाईन नहीं थी। बेस लाईन वर्ष17-18 के अंतिम चरण में आई है। इसल िए शौचालयों की एमआईएस डाटा के साथ जीओ टैगिंग नहीं हो सकी। जिसके कारण जांच में उन्हें अपूर्ण मान लिया गया। ब्यूरो
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