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29 साल बाद कैफी का सपना साकार
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 29 Jan 2016 11:40 PM IST
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प्रख्यात शायर कैफी आजमी का अपने पैतृक आवास पर काबिज होने का अधूरा सपना 29 साल तक मुकदमा चलने के बाद शुक्रवार को पूरा हुआ। लंबी लड़ाई के बाद सुलहनामे के जरिए उनकी पुत्री शबाना आजमी ने विपक्षी पार्टी को 20 लाख्ा रुपये देकर कर शुक्रवार को पैतृक घर पर कब्जा पाया। मुकदमे में सुलह से कैफी के गांव मेजवां में जश्न का माहौल था। शबाना के समर्थकों पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया।
शबाना आजमी के अधिवक्ता रवि नरायन राय के मुताबिक फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के मेजवां गांव निवासी अतहर हुसैन उर्फ कैफी आजमी के पैतृक आवास पर पट्टीदार मेंहदी हसन आदि का कब्जा था। 1980 में कैफी आजमी के मुंबई से वापस घर लौटने पर इन लोगों ने मकान और सहन से कब्जा नहीं छोड़ा।
इस पर कैफी ने मेंहदी हसन के खिलाफ 1987 में सिविल वाद दायर कर दिया और पैतृक मकान के बगल में फतेह मंजिल नामक भवन बनाकर रहने लगे। 2002 में कैफी की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद से ही शबाना इस मुकदमे की पैरवी और सुलह समझौते में लग गईं थीं। उस समय विपक्षी 40 लाख रुपये की मांग कर रहे थे।
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इसी बीच मेंहदी हसन की भी मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे आबिद हुसैन मुकदमे की पैरवी करने लगे। शबाना जब भी मुंबई से गांव आतीं तो सुलह की बात उठती, लेकिन रकम पर आकर बात रुक जाती थी। बाद में 20 लाख रुपये में मामला तय हो गया और शबाना की तरफ से आबिद हुसैन को रकम अदा कर दी गई। शुक्रवार को मुकदमे की तारीख थी।
इसी दिन विपक्षी आबिद हुसैन ने सुलहनामा लिखकर अदालत में प्रस्तुत कर दिया। सिविल जज जूनियर डिविजन कमलदीप की अदालत ने उसे स्वीकार करते हुए निस्तारित कर दिया। वर्षों से चल रहे इस मुकदमे में जीत मिलने के बाद गांव में जश्न का माहौल है। सुलह में शबाना आजमी के अधिवक्ता रविनरायन राय और आबिद हुसैन 0के अधिवक्ता दीना चौहान की भी अहम भूमिका रही।
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शबाना आजमी के अधिवक्ता रवि नरायन राय के मुताबिक फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के मेजवां गांव निवासी अतहर हुसैन उर्फ कैफी आजमी के पैतृक आवास पर पट्टीदार मेंहदी हसन आदि का कब्जा था। 1980 में कैफी आजमी के मुंबई से वापस घर लौटने पर इन लोगों ने मकान और सहन से कब्जा नहीं छोड़ा।
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इस पर कैफी ने मेंहदी हसन के खिलाफ 1987 में सिविल वाद दायर कर दिया और पैतृक मकान के बगल में फतेह मंजिल नामक भवन बनाकर रहने लगे। 2002 में कैफी की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद से ही शबाना इस मुकदमे की पैरवी और सुलह समझौते में लग गईं थीं। उस समय विपक्षी 40 लाख रुपये की मांग कर रहे थे।
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इसी बीच मेंहदी हसन की भी मौत हो गई। इसके बाद उनके बेटे आबिद हुसैन मुकदमे की पैरवी करने लगे। शबाना जब भी मुंबई से गांव आतीं तो सुलह की बात उठती, लेकिन रकम पर आकर बात रुक जाती थी। बाद में 20 लाख रुपये में मामला तय हो गया और शबाना की तरफ से आबिद हुसैन को रकम अदा कर दी गई। शुक्रवार को मुकदमे की तारीख थी।
इसी दिन विपक्षी आबिद हुसैन ने सुलहनामा लिखकर अदालत में प्रस्तुत कर दिया। सिविल जज जूनियर डिविजन कमलदीप की अदालत ने उसे स्वीकार करते हुए निस्तारित कर दिया। वर्षों से चल रहे इस मुकदमे में जीत मिलने के बाद गांव में जश्न का माहौल है। सुलह में शबाना आजमी के अधिवक्ता रविनरायन राय और आबिद हुसैन 0के अधिवक्ता दीना चौहान की भी अहम भूमिका रही।