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अपने ही आवास के पास अतिक्रमण रोकने में नाकाम प्रशासन
Updated Fri, 02 Feb 2018 11:32 PM IST
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आजमगढ़। जिले को संभालने वाले अफसर अपने आवास के अगल-बगल हो रहे निर्माण को रोक पाने में भी नाकाम साबित हो रहे हैं। लोगों ने जिले के इन अधिकारियों के भवन से सटाकर आवास का निर्माण करा लिया है।
जनपद में अवैध निर्माणों की हालत ऐसी है कि जिधर देखो उधर अवैध निर्माण हो रहे हैं। इन्हें रोकने की रोकने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है आज खुद अपने अगल-बगल अवैध निर्माण होते देख रहा है। जबकि गोपनीयता और इन्हें भीड़भाड़ से बचाने के लिए नियम बनाया गया था कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक आवास से दो सौ मीटर की परिधि में कोई भी आवासीय निर्माण नहीं हो सकता है। लेकिन जनपद में जिलाधिकारी आवास हो या पुलिस अधीक्षक आवास इसकी बाउंड्रीवाल से सटाकर लोगों ने आवासीय भवन बना रखे हैं। कई लोग तो इस संबंध में न्यायालय में मुकदमा भी लड़ रहे हैं। पहले जब यह आवास बने थे तो इसके अगल-बगल आबादी नहीं थी। लेकिन समय बीतने के साथ आबादी बढ़ती गई। आज हालात यह है कि जिलाधिकारी आवास हो या पुलिस अधीक्षक आवास घनी आबादी के बीच आ गया है। पूर्व के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और वर्तमान अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है।
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जनपद में अवैध निर्माणों की हालत ऐसी है कि जिधर देखो उधर अवैध निर्माण हो रहे हैं। इन्हें रोकने की रोकने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है आज खुद अपने अगल-बगल अवैध निर्माण होते देख रहा है। जबकि गोपनीयता और इन्हें भीड़भाड़ से बचाने के लिए नियम बनाया गया था कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक आवास से दो सौ मीटर की परिधि में कोई भी आवासीय निर्माण नहीं हो सकता है। लेकिन जनपद में जिलाधिकारी आवास हो या पुलिस अधीक्षक आवास इसकी बाउंड्रीवाल से सटाकर लोगों ने आवासीय भवन बना रखे हैं। कई लोग तो इस संबंध में न्यायालय में मुकदमा भी लड़ रहे हैं। पहले जब यह आवास बने थे तो इसके अगल-बगल आबादी नहीं थी। लेकिन समय बीतने के साथ आबादी बढ़ती गई। आज हालात यह है कि जिलाधिकारी आवास हो या पुलिस अधीक्षक आवास घनी आबादी के बीच आ गया है। पूर्व के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और वर्तमान अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है।
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