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मरीज हुए ज्यादा, बेड पड़ रहे कम, मची अफरा-तफरी
Updated Wed, 12 Sep 2018 11:56 PM IST
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आजमगढ़। मंडलीय अस्पताल में मरीज ज्यादा होने से वार्डों में बेड कम पड़ रहे हैं। जिसके चलते पहले से भर्ती मरीजों को डिसचार्ज कर नए मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। इसके लिए अस्पताल प्रशासन के अनुसार आपरेशन के बाद मात्र तीन दिन ही मरीज अस्पताल में भर्ती रह सकते हैं। बुधवार को सीएमएस ने वार्डों का भ्रमण कर कई मरीजों को डिस्चार्ज किया, जिससे भर्ती मरीजों में नाराजगी है। इस दौरान कई मरीजों को जबरन पुलिस आदि बुला कर बाहर करने की भी बात कही गई।
मंडलीय अस्पताल में 200 बेड हैं। जिसमें पचास बेड अलग-अलग योजनाओं में लगे हुए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए मात्र डेढ़ सौ बेड ही है। बरसात का मौसम होने के चलते इन दिनों सर्दी, जुखाम, बुखार, डायरिया समेत अन्य संक्रामक रोग से ग्रसित मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। अस्पताल प्रशासन की माने तो प्रतिदिन 60 से 70 मरीज अस्पताल पर भर्ती के लिए आ रहे हैं। ऐसे में यदि पहले से भर्ती मरीजो को डिसचार्ज नहीं किया जाए तो नए मरीजों के लिए बेड ही उपलब्ध नहीं होंगे। बुधवार को एसआईसी डॉ. श्री कृष्ण गोपाल सिंह ने वार्डों का भ्रमण किया और तीन दिन से अस्पताल में भर्ती मरीजों को डिसचार्ज कराना शुरू किया। इसमें कई मरीज तो ऐसे थे, जिनका आपरेशन हुआ है और वे चलने-फिरने के लायक भी नहीं है। कई मरीजों ने विरोध जताया कहा कि आपरेशन के बाद मरीज को तीन दिन में छोड़ने का फरमान कहीं से भी न्याय संगत नहीं है। आर्थो के मरीज तो प्लास्टर आदि लगने के बाद घर भेजे जा सकते हैं, लेकिन जिनका आपरेशन हुआ है उन्हें कम से कम सप्ताहभर तो अपनी देख-रेख में रखा जाना जरूरी है।
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किसी भी मरीज को जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। हमारे समक्ष विकट समस्या खड़ी हो गई है। सीएचसी-पीएचसी से सहयोग न मिलने से मंडलीय अस्पताल पर लोड ज्यादा हो गया है। प्रतिदिन 60-70 भर्ती योग्य मरीज अस्पताल पर आ रहे हैं। ऐसे में यदि पहले से भर्ती मरीज को डिसचार्ज नहीं किया जाएगा तो नए की भर्ती कैसे की जाएगी।
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डॉ. श्री कृष्ण गोपाल सिंह, एसआईसी, मंडलीय अस्पताल, आजमगढ़।
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मंडलीय अस्पताल में 200 बेड हैं। जिसमें पचास बेड अलग-अलग योजनाओं में लगे हुए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए मात्र डेढ़ सौ बेड ही है। बरसात का मौसम होने के चलते इन दिनों सर्दी, जुखाम, बुखार, डायरिया समेत अन्य संक्रामक रोग से ग्रसित मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। अस्पताल प्रशासन की माने तो प्रतिदिन 60 से 70 मरीज अस्पताल पर भर्ती के लिए आ रहे हैं। ऐसे में यदि पहले से भर्ती मरीजो को डिसचार्ज नहीं किया जाए तो नए मरीजों के लिए बेड ही उपलब्ध नहीं होंगे। बुधवार को एसआईसी डॉ. श्री कृष्ण गोपाल सिंह ने वार्डों का भ्रमण किया और तीन दिन से अस्पताल में भर्ती मरीजों को डिसचार्ज कराना शुरू किया। इसमें कई मरीज तो ऐसे थे, जिनका आपरेशन हुआ है और वे चलने-फिरने के लायक भी नहीं है। कई मरीजों ने विरोध जताया कहा कि आपरेशन के बाद मरीज को तीन दिन में छोड़ने का फरमान कहीं से भी न्याय संगत नहीं है। आर्थो के मरीज तो प्लास्टर आदि लगने के बाद घर भेजे जा सकते हैं, लेकिन जिनका आपरेशन हुआ है उन्हें कम से कम सप्ताहभर तो अपनी देख-रेख में रखा जाना जरूरी है।
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किसी भी मरीज को जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। हमारे समक्ष विकट समस्या खड़ी हो गई है। सीएचसी-पीएचसी से सहयोग न मिलने से मंडलीय अस्पताल पर लोड ज्यादा हो गया है। प्रतिदिन 60-70 भर्ती योग्य मरीज अस्पताल पर आ रहे हैं। ऐसे में यदि पहले से भर्ती मरीज को डिसचार्ज नहीं किया जाएगा तो नए की भर्ती कैसे की जाएगी।
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डॉ. श्री कृष्ण गोपाल सिंह, एसआईसी, मंडलीय अस्पताल, आजमगढ़।