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निदेशालय भेजी गई जांच रिपोर्ट और सेवा विस्तार पत्रावली
Updated Sat, 24 Mar 2018 11:36 PM IST
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आजमगढ़। संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक मंडल आजमगढ़ कार्यालय से प्रभारी प्रधानाचार्या जीजीआईसी अनवर जहां की सेवा विस्तार पत्रावली निदेशालय को भेज दी गई है। इतना ही नहीं विद्यालय की एक शिक्षिका की शिकायत पर चल रही वित्तीय अनियमितता की जांच की रिपोर्ट भी निदेशालय को भेजी है।
2016 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रभारी प्रधानाचार्या अनवर जहां को पांच साल का सेवा विस्तार मिलना है। इसके लिए उन्होंने अपनी फाइल सीधे निदेशालय भेजी जहां से डीआईओएस और जेडी की आख्या के साथ फाइल भेजने को कहा गया। प्रधानाचार्या की फाइल डीआईओएस कार्यालय से जेडी कार्यालय में ठंडे बस्ते में डाल दी गई। प्रधानाचार्या का आरोप है और फाइल भेजने के नाम पर पांच लाख रुपये की मांग की जाने लगी। इस बीच जीजीआईसी के एक शिक्षिका द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच जेडी को मिली। जांच में दो साल के मूल्यांकन के बिल वाउचर में तत्कालीन डीआईओएस का फर्जी हस्ताक्षर पर जेडी ने प्रधानाचार्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश जारी कर दिया। इस बीच प्रधानाचार्य भी अपने सेवा विस्तार के प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट चली गई। जिस पर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में पत्रावली प्रेषित करने को कहा था।
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मेरी प्रधानाचार्य से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उनके सेवा विस्तार पत्रावली को भेजने में देरी का कारण उनके खिलाफ चल रही वित्तीय अनियमितता की जांच है। जांच की प्रक्रिया पूरी होते ही सेवा विस्तार की पत्रावली और जांच आख्या निदेशालय को भेज दी गई है। जहां तक हाईकोर्ट के आदेश की बात है तो मैंने अभी आदेश देखा नहीं है। अब शासन जैसा चाहेगा वैसा आगे होगा। वैसे प्रधानाचार्य पर एक-दो नहीं कई आरोप है। कई मामले तो उनके साथ काम करने वाली शिक्षिकाओं ने ही लगाए है। पांच लाख मांगने वाली बात भी गलत है।
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-अनारपति वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक, आजमगढ़ मंडल, आजमगढ़।
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2016 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रभारी प्रधानाचार्या अनवर जहां को पांच साल का सेवा विस्तार मिलना है। इसके लिए उन्होंने अपनी फाइल सीधे निदेशालय भेजी जहां से डीआईओएस और जेडी की आख्या के साथ फाइल भेजने को कहा गया। प्रधानाचार्या की फाइल डीआईओएस कार्यालय से जेडी कार्यालय में ठंडे बस्ते में डाल दी गई। प्रधानाचार्या का आरोप है और फाइल भेजने के नाम पर पांच लाख रुपये की मांग की जाने लगी। इस बीच जीजीआईसी के एक शिक्षिका द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच जेडी को मिली। जांच में दो साल के मूल्यांकन के बिल वाउचर में तत्कालीन डीआईओएस का फर्जी हस्ताक्षर पर जेडी ने प्रधानाचार्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश जारी कर दिया। इस बीच प्रधानाचार्य भी अपने सेवा विस्तार के प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट चली गई। जिस पर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में पत्रावली प्रेषित करने को कहा था।
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मेरी प्रधानाचार्य से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उनके सेवा विस्तार पत्रावली को भेजने में देरी का कारण उनके खिलाफ चल रही वित्तीय अनियमितता की जांच है। जांच की प्रक्रिया पूरी होते ही सेवा विस्तार की पत्रावली और जांच आख्या निदेशालय को भेज दी गई है। जहां तक हाईकोर्ट के आदेश की बात है तो मैंने अभी आदेश देखा नहीं है। अब शासन जैसा चाहेगा वैसा आगे होगा। वैसे प्रधानाचार्य पर एक-दो नहीं कई आरोप है। कई मामले तो उनके साथ काम करने वाली शिक्षिकाओं ने ही लगाए है। पांच लाख मांगने वाली बात भी गलत है।
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-अनारपति वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक, आजमगढ़ मंडल, आजमगढ़।