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फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाला शिक्षक बर्खास्त
Updated Tue, 26 Dec 2017 11:21 PM IST
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आजमगढ़। जिले में फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे एक शिक्षक को मंगलवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. बीके शर्मा ने बर्खास्त कर दिया। इसके साथ ही शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
वशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007, 2008 और 2008 (विशेष चयन) में चयनित विकलांगजनों के विकलांगता प्रमाण पत्र आधार पर प्रशिक्षण पाने वाले अभ्यर्थियों के भौतिक सत्यापन लखनऊ में मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया। विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा 12 जनपदों में विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर चयनित कुल 231 लोगों की जांच की गई। जिसमें कुल 72 चयनित अभ्यर्थियों का विकलांगता प्रमाणित नहीं पाई गई। जिसमें आजमगढ़ के कुल 21 लोग थे। विशेष मोडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद उप्र लखनऊ ने संबंधित जिलों के डायट प्राचार्य को उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही अगर वह सेवायोजित हैं तो उन्हें सेवा से मुक्त करने का भी निर्देश दिया। इस प्रकरण में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय टीम का गठन किया। मंगलवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. बीके शर्मा ने महराजगंज ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बरोही चौबे में तैनात सहायक अध्यापक चंद्रशेखर सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह को कार्यमुक्त करते हुए उनके खिलाफ वसूली और सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश खंड शिक्षा अधिकारी महराजगंज को दिया। उनकी इस कार्रवाई से जिले के 20 अन्य अभ्यर्थियों पर भी नौकरी जाने का खतरा मंडराने लगा है।
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फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र लगाकर चंद्रशेखर सिंह ने विशिष्ट बीटीसी में चयनित हुए थे। विशेष मेडिकल बोर्ड की जांच में सीएमओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया। जिसके आधार पर आज इनके बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए वसूली और सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दे दिया गया है।
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वशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007, 2008 और 2008 (विशेष चयन) में चयनित विकलांगजनों के विकलांगता प्रमाण पत्र आधार पर प्रशिक्षण पाने वाले अभ्यर्थियों के भौतिक सत्यापन लखनऊ में मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया। विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा 12 जनपदों में विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर चयनित कुल 231 लोगों की जांच की गई। जिसमें कुल 72 चयनित अभ्यर्थियों का विकलांगता प्रमाणित नहीं पाई गई। जिसमें आजमगढ़ के कुल 21 लोग थे। विशेष मोडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद उप्र लखनऊ ने संबंधित जिलों के डायट प्राचार्य को उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही अगर वह सेवायोजित हैं तो उन्हें सेवा से मुक्त करने का भी निर्देश दिया। इस प्रकरण में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय टीम का गठन किया। मंगलवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. बीके शर्मा ने महराजगंज ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय बरोही चौबे में तैनात सहायक अध्यापक चंद्रशेखर सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह को कार्यमुक्त करते हुए उनके खिलाफ वसूली और सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश खंड शिक्षा अधिकारी महराजगंज को दिया। उनकी इस कार्रवाई से जिले के 20 अन्य अभ्यर्थियों पर भी नौकरी जाने का खतरा मंडराने लगा है।
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फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र लगाकर चंद्रशेखर सिंह ने विशिष्ट बीटीसी में चयनित हुए थे। विशेष मेडिकल बोर्ड की जांच में सीएमओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया। जिसके आधार पर आज इनके बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए वसूली और सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दे दिया गया है।
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