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खरपतवार नियंत्रण के लिए किसानों को किया जागरुक

Thu, 10 Jan 2019 11:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jan 2019 11:44 PM IST
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खरपतवार नियंत्रण के लिए किसानों को किया जागरुक
बूढ़नपुर। विकास खण्ड कोयलसा में कृषि गोष्ठी के माध्यम से कृषि इकाई प्रभारी संतोष यादव ने किसानों को जागरूक किया। उन्होने बताया कि गेहूं की अगेती और मध्यम प्रजातियों में खरपतवार नियंत्रण समय से होना अत्यंत आवश्यक है। पहले प्रबंधन न होने से फसल के नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय से तैयार होना किसानों के सामने चुनौती होगी। चौड़ी पत्ती के साथ गेहूं का मामा बनरी सहित पतली पत्ती के खरपतवारों को नष्ट करने में रसायन के साथ समय का बहुत बड़ा महत्व है। कृषि विशेषज्ञ रुपचन्द गुप्ता ने प्रखर धूप खिलने के बाद भी दवा छिड़काव की सलाह दी। इसके साथ ही खरपतवारनाषी रसायनों को उर्वरक में मिलाकर छिड़कने की बजाय पानी के साथ स्प्रे करने पर बल दिया। बताया नाजिल से सीधे छिड़काव करते हुए पीछे की ओर चलते हुए दवा का छिड़काव करना चाहिए। इससे प्रक्षेत्र में पड़ चुकी दवा की कड़ी न टूटने की बात को लेकर किसानों को सचेत किया गया है। कृषि विषेषज्ञ ने बताया कि गेहूं में मुख्यत: चौड़ी व पतली पत्ती के खरपतवारों का प्रकोप होता है। चौड़ी पत्ती में बथुआ, कृष्णनील, जंगली मटर, भटकोईया आदि प्रजातियां आती है। इनसे नियंत्रण के लिए 13 ग्राम सल्फोसल्फूरान प्रति एकड़ की दवा का प्रयोग पानी में मिलाकर करना चाहिए। पतली पत्ती में जंगली जई, गेहूं का मामा आदि आते हैं। इनके लिए मेट्राब्यूजिन 20ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के लिए निर्धारित की गयी है। गेहूूं के जिस खेत में चौड़ी और पतली पत्ती दोनों प्रकार के खरपतरवार हो वहां पर मेट सल्फूरान आठ ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। बाजार में यह टोटल या आलग्रिप के नाम से उपलब्ध है। कृषि विषेषज्ञ ने किसानों को सचेत करते हुए बताया कि खरपतवार नाषी रसायनों का प्रयोग कभी भी उर्वरक या बालू में मिलाकर नहीं करना चाहिए। इसे उसका प्रभाव नहीं पड़ता। स्प्रे से छिड़काव में सावधानी के प्रति सचेत करते हुए बताया कि इसमें फ्लैटपैन नाजिय या कट नाजिल का ही प्रयोग करें। दवा का छिड़काव करते समय नाजिल को दाएं.बाएं न घुमाकर हाथ को सीधा रखें। दवा छिड़कते समय पीछे की ओर बढना चाहिए। आगे बढने पर पैरों के चलने से दवा का चक्र टूट जाता है और वह उस स्थान पर प्रभावी नहीं होता है। इस मौके पर लालजी पाण्डेय,हरिहर राय, अशोक सिंह, संतोष सिंह, पारसनाथ वर्मा, शोभा वर्मा, रमेश वर्मा, भुक्खू सिंह, जगन्नाथ सिंह, उदयराज यादव सहित अनेक किसान मौजूद रहे।
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