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संसाधनों के अभाव में निजी विद्यालयों को देंगे चुनौती
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:32 PM IST
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आजमगढ़। जिले के अंग्रेजी विद्यालयों में चयनित शिक्षकों के द्वितीय बैच का प्रशिक्षण मंगलवार को डायट परिसर में शुरू हुआ। जिसमें चयनित शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बच्चों को शिक्षित करने के नए तरीकों से अवगत हुए।
यह सच है कि सरकारी संसाधन कागजों तक ही सिमटा हुआ है। संसाधनों के अभाव के बावजूद परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक निजी स्कूलों को चुनौती देने की तैयारी में हैं। जिसके तहत सरकार की मंशानुरूप कुछ परिषदीय विद्यालयों के अंग्रेजी विद्यालय के रूप में चलाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत शिक्षकों के चयन का कार्य हो चुका है। चयनित शिक्षकों के द्वितीय बैच का प्रशिक्षण मंगलवार को डायट परिसर में शुरू हुआ। जिसमें उन्हें बताया गया कि वह खुद को ऐसे परिवेश में ढ़ालने की कोशिश कर रहे हैं कि वह अंग्रेजी में ही बातचीत करें। डायट प्राचार्य परमहंस सिंह यादव के दिशा निर्देशन पर ट्रेनिंग दे रहे प्रशिक्षक लक्ष्मीकांत मिश्र, प्रियंका श्रीवास्तव, शालिनी मिश्र का कहना है कि हमारे परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हर शिक्षक किसी भी निजी विद्यालय के शिक्षक से ज्यादा योग्य हैं। वह ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन भी कर रहे हैं। कमी अभिभावकों की है जो वह अपने बच्चों को योग्य शिक्षकों के सानिध्य में भेजने के बजाए निजी स्कूलों के अप्रशिक्षित शिक्षकों के पास शिक्षा के लिए भेज रहे हैं।
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यह सच है कि सरकारी संसाधन कागजों तक ही सिमटा हुआ है। संसाधनों के अभाव के बावजूद परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक निजी स्कूलों को चुनौती देने की तैयारी में हैं। जिसके तहत सरकार की मंशानुरूप कुछ परिषदीय विद्यालयों के अंग्रेजी विद्यालय के रूप में चलाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत शिक्षकों के चयन का कार्य हो चुका है। चयनित शिक्षकों के द्वितीय बैच का प्रशिक्षण मंगलवार को डायट परिसर में शुरू हुआ। जिसमें उन्हें बताया गया कि वह खुद को ऐसे परिवेश में ढ़ालने की कोशिश कर रहे हैं कि वह अंग्रेजी में ही बातचीत करें। डायट प्राचार्य परमहंस सिंह यादव के दिशा निर्देशन पर ट्रेनिंग दे रहे प्रशिक्षक लक्ष्मीकांत मिश्र, प्रियंका श्रीवास्तव, शालिनी मिश्र का कहना है कि हमारे परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हर शिक्षक किसी भी निजी विद्यालय के शिक्षक से ज्यादा योग्य हैं। वह ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन भी कर रहे हैं। कमी अभिभावकों की है जो वह अपने बच्चों को योग्य शिक्षकों के सानिध्य में भेजने के बजाए निजी स्कूलों के अप्रशिक्षित शिक्षकों के पास शिक्षा के लिए भेज रहे हैं।
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