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बीएसए पर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करने का आरोप
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:12 AM IST
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आजमगढ़। तहबरपुर ब्लाक के नेवादा गांव निवासी अरुण कुमार राय की नियुक्ति 2004 में जूनियर हाई स्कूल बीबीपुर कदीम पर बतौर लिपिक हुई थी। तैनाती के बाद शिकायत होने और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने पर खुद को घिरता देख बीएसए ने लिपिक को बर्खास्त कर दिया। लिपिक की पत्नी ने मुख्यमंत्री को पत्रक भेज कर बीएसए पर मनमानी कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
सीएम को भेजे पत्रक में बर्खास्त लिपिक अरुण कुमार राय की पत्नी नीतू राय ने आरोप लगाया कि गांव के ही कमलेश राय ने उसके पति के नियुक्ति की वैधता की शिकायत की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन बीएसए राकेश कुमार ने जांच में नियुक्ति में कोई गड़बड़ी नहीं पाई थी। हाईकोर्ट में उनके काउंटर लगाने पर मामला खत्म हो गया। शिकायतकर्ता ने दुबारा हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट के आदेश के बाद भी बीएसए ने काउंटर दाखिल नहीं किया। और लिपिक को अपना पक्ष रखने के लिए 13 को उपस्थित होने को कहा। बार-बार की नोटिस के बाद भी काउंटर दाखिल न करने पर न्यायालय में 12 जुलाई को उन्हें स्वयं उपस्थित होकर शपथ-पत्र देने को कहा। इस पर बीएसए ने मेडिकल भेज दिया। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अमान्य मानते हुए 13 को उपस्थित होने के निर्देश दिया। इस पर बीएसए ने पक्ष सुनने के बजाय खुद को न्यायालय के अवमानना से बचाने के लिए 12 को ही अरुण को बर्खास्त कर दिया।
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बिना पक्ष सुने कोई भी निर्णय नहीं हुआ है। जहां तक 13 को सुनवाई के लिए बुलाने के पूर्व 12 को ही कार्रवाई की बात है तो हाईकोर्ट ने 13 को सुनवाई के लिए मुझे बुला लिया था। इसके चलते 12 को ही बर्खास्त लिपिक को कार्यालय बुला कर उसका पक्ष सुना गया। अपने पक्ष में लिपिक कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सका। इसके चलते उसे बर्खास्त करने की कार्रवाई 12 जुलाई को ही कर दी गई। मैंने न्यायालय से इस मामले में कुछ समय मांगा था, लेकिन न्यायालय ने समय नहीं दिया, जिसके चलते निर्णय सुनाना पड़ा।
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देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए, आजमगढ़।
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सीएम को भेजे पत्रक में बर्खास्त लिपिक अरुण कुमार राय की पत्नी नीतू राय ने आरोप लगाया कि गांव के ही कमलेश राय ने उसके पति के नियुक्ति की वैधता की शिकायत की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन बीएसए राकेश कुमार ने जांच में नियुक्ति में कोई गड़बड़ी नहीं पाई थी। हाईकोर्ट में उनके काउंटर लगाने पर मामला खत्म हो गया। शिकायतकर्ता ने दुबारा हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट के आदेश के बाद भी बीएसए ने काउंटर दाखिल नहीं किया। और लिपिक को अपना पक्ष रखने के लिए 13 को उपस्थित होने को कहा। बार-बार की नोटिस के बाद भी काउंटर दाखिल न करने पर न्यायालय में 12 जुलाई को उन्हें स्वयं उपस्थित होकर शपथ-पत्र देने को कहा। इस पर बीएसए ने मेडिकल भेज दिया। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अमान्य मानते हुए 13 को उपस्थित होने के निर्देश दिया। इस पर बीएसए ने पक्ष सुनने के बजाय खुद को न्यायालय के अवमानना से बचाने के लिए 12 को ही अरुण को बर्खास्त कर दिया।
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बिना पक्ष सुने कोई भी निर्णय नहीं हुआ है। जहां तक 13 को सुनवाई के लिए बुलाने के पूर्व 12 को ही कार्रवाई की बात है तो हाईकोर्ट ने 13 को सुनवाई के लिए मुझे बुला लिया था। इसके चलते 12 को ही बर्खास्त लिपिक को कार्यालय बुला कर उसका पक्ष सुना गया। अपने पक्ष में लिपिक कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सका। इसके चलते उसे बर्खास्त करने की कार्रवाई 12 जुलाई को ही कर दी गई। मैंने न्यायालय से इस मामले में कुछ समय मांगा था, लेकिन न्यायालय ने समय नहीं दिया, जिसके चलते निर्णय सुनाना पड़ा।
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देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए, आजमगढ़।