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तीन बंगलों पर कब्जे के मामले में बैठाई गई जांच
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:24 AM IST
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आजमगढ़। शहर स्थित अंग्रेजों के जमाने के तीन सरकारी बंगलों पर कब्जे का मामला अमर उजाला की ओर से उठाने के बाद जिलाधिकारी ने इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच बिठा दी है। डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने एडीएम एफआई को जांच सौंपते हुए सीत दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। दो बंगलों पर नेता तो एक पर सेवानिवृत्त अधिकारी के परिजन काबिज हैं। इनकी पट्टे की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। एक बंगले में कुछ जमीन को बेचा भी गया है।
शहर के रैदोपुर क्षेत्र में प्रशासन की ओर से एक्वायर जमीन को निर्माण, बागवानी आदि के लिए 1927 में लीज पर दी गई थी। लीज लेने वालों में श्रीपत नारायण सिंह, रामधीन राम और एक अन्य शामिल थे। ये जमीन उन्हें इस शर्त के साथ दी गई थी कि इसमें एसडीएम रहेंगे। उनके न रहने और खाली होने पर वो इसमें रह सकते थे। अधिकतम 99 वर्ष की लीज की सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है। आवंटन को 30-30 साल पर रिन्यू किया जाता था। प्रशासनिक सूत्रों की माने तो शासनादेश के बाद भी बंगले फ्री होल्ड भी नहीं हुए हैं। श्रीपत नारायण सिंह के बंगले में पूर्व मंत्री दल सिंगार यादव, पूर्व एसडीएम रामधीन राम के बंगले में उनका परिवार और अन्य बंगले में कुछ जमीन पर बैनामा लेने का दावा करने वाले भाजपा नेता जर्नादन सिंह गौतम काबिज हैं। जमीन का बैनामा कैसे कर दिया गया और तीन-चार बिस्वे जमीन का बैनामा लेने वाले कई एकड़ में बने बंगले के मालिक कैसे बन बैठे इस बारे में कोई अधिकारी भी कुछ कहने को तैयार नहीं थे।
इस बीच एक बंगले पर काबिज जर्नादन सिंह गौतम ने सीएम को पत्र भेजकर बंगले को 99 साल के आवंटित करने की मांग उठा दी। सीएम के विशेष की ओर से इस पर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए गए थे। जांच शुरू होते ही मामला सुर्खियों में आ गया। अमर उजाला ने तीनों बंगलों का मामला प्रमुखता के साथ उठाया था। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इस संबंध में सीडीओ अनिल कुमार उपाध्याय को निर्देशित किया। सीडीओ ने एडीएम एफआई बीके गुप्ता को जांच अधिकारी नामित करते हुए सात दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। जांच शुरू होने के बाद हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन बंगलों की जांच एडीएम एफआर को सौंपी गई है। सात दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
अनिल कुमार उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी
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शहर के रैदोपुर क्षेत्र में प्रशासन की ओर से एक्वायर जमीन को निर्माण, बागवानी आदि के लिए 1927 में लीज पर दी गई थी। लीज लेने वालों में श्रीपत नारायण सिंह, रामधीन राम और एक अन्य शामिल थे। ये जमीन उन्हें इस शर्त के साथ दी गई थी कि इसमें एसडीएम रहेंगे। उनके न रहने और खाली होने पर वो इसमें रह सकते थे। अधिकतम 99 वर्ष की लीज की सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है। आवंटन को 30-30 साल पर रिन्यू किया जाता था। प्रशासनिक सूत्रों की माने तो शासनादेश के बाद भी बंगले फ्री होल्ड भी नहीं हुए हैं। श्रीपत नारायण सिंह के बंगले में पूर्व मंत्री दल सिंगार यादव, पूर्व एसडीएम रामधीन राम के बंगले में उनका परिवार और अन्य बंगले में कुछ जमीन पर बैनामा लेने का दावा करने वाले भाजपा नेता जर्नादन सिंह गौतम काबिज हैं। जमीन का बैनामा कैसे कर दिया गया और तीन-चार बिस्वे जमीन का बैनामा लेने वाले कई एकड़ में बने बंगले के मालिक कैसे बन बैठे इस बारे में कोई अधिकारी भी कुछ कहने को तैयार नहीं थे।
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इस बीच एक बंगले पर काबिज जर्नादन सिंह गौतम ने सीएम को पत्र भेजकर बंगले को 99 साल के आवंटित करने की मांग उठा दी। सीएम के विशेष की ओर से इस पर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए गए थे। जांच शुरू होते ही मामला सुर्खियों में आ गया। अमर उजाला ने तीनों बंगलों का मामला प्रमुखता के साथ उठाया था। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इस संबंध में सीडीओ अनिल कुमार उपाध्याय को निर्देशित किया। सीडीओ ने एडीएम एफआई बीके गुप्ता को जांच अधिकारी नामित करते हुए सात दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। जांच शुरू होने के बाद हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन बंगलों की जांच एडीएम एफआर को सौंपी गई है। सात दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
अनिल कुमार उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी