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भाजपा संगठन को उठाना पड़ सकता है नतीजों का खामियाजा
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आजमगढ़। जनपद की दोनों लोकसभा सीटों पर करारी हार का खामियाजा भाजपा के जिला स्तरीय संगठन को उठाना पड़ सकता है। संगठन में जारी आपसी गुटबंदी किसी से छिपी नहीं है। शीर्ष नेतृत्व को भी इसकी खबर थी। अब इतने बुरे परिणाम के बाद कई पदाधिकारियों को अपनी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि संगठन अभी दोनों लोकसभा सीटों पर पार्टी के वोट बढ़ने की बात कह अपना बचाव करने में लगा है।
लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान से पूर्व भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी दोनों सीटों पर जीत के दावे कर रहे थे। हालांकि मतदान के दिन तक उनके ये बोल भी बदलने लगे और आजमगढ़ सीट पर हर हाल में जीत का दावा किया। मतदान से पहले मंदुरी में आयोजित प्रधानमंत्री की जनसभा की भीड़ ने ही स्थानीय संगठन और उनकी तैयारियों की पोल खोल कर रख दी थी। रैली में गठबंधन की रमहा रैली से भी कम भीड़ उमड़ी थी। नीलम सोनकर के समर्थन में अंबारी में आयोजित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सभा में कुर्सियां तक खाली पड़ी थीं। स्थिति ये रही कि सभा में मंच पर ही नीलम सोनकर रो पड़ी थीं। पूरे चुनाव के दौरान भाजपा संगठन आजमगढ़ में निरहुआ का प्रचार करते नजर आ रहा था।लालगंज संसदीय सीट के कार्यकर्ता भी निरहुआ की सभाओं के लिए लगे थे। भाजपा जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह भी अपना 80 फीसदी समय आजमगढ़ लोकसभा सीट पर देते नजर आए। लालगंज सीट पर विधायक अरुणकांत यादव, पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह, ध्रुव सिंह और अहरौला क्षेत्र के कुछ पदाधिकारी ही नजर आ रहे थे। संभवत: इसकी शिकायत भी हाईकमान को गई थी। संगठन की बिखराव इस चुनाव में खुल कर सामने आया है। कई वरिष्ठ नेता तो अपना जनपद छोड़ दूसरे जिलों की कमान संभालते नजर आए। अब परिणाम सामने आ गए हैं। इसका खामियाजा भी संगठन के लोगों को उठाना है ये बात भी पदाधिकारी जानते हैं। फिलहाल वो दोनों ही सीटों पर भाजपा का वोट बढ़ने की बात कह अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।
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हर बूथ पर मजबूत टीम का दावा, एजेंट कर पूरे नहीं बने
मतदान से पहले तक भाजपा के पदाधिकारी हर बूथ पर संगठित और मजबूत टीम के होने का दावा करते नजर आए। जब मतदान का दिन आया तो जनपद में 50 से ज्यादा बूथ ऐसे थे जहां भाजपा अपने एजेंट तक नहीं बना पाई थी। स्वयं जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह ने स्वीकार किया था कि 25 बूथ पर एजेंट नहीं थे। इससे भाजपा की चुनाव तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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देश में फिर से मोदी सरकार बनने पर जनता को बधाई। गठबंधन नहीं होता तो दोनों सीटों पर भाजपा को जीत मिलती। दोनों ही सीटों पर पार्टी के वोट बढ़े हैं। चुनाव में हार का कारण गठबंधन रहा है। - जयनाथ सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा
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लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान से पूर्व भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी दोनों सीटों पर जीत के दावे कर रहे थे। हालांकि मतदान के दिन तक उनके ये बोल भी बदलने लगे और आजमगढ़ सीट पर हर हाल में जीत का दावा किया। मतदान से पहले मंदुरी में आयोजित प्रधानमंत्री की जनसभा की भीड़ ने ही स्थानीय संगठन और उनकी तैयारियों की पोल खोल कर रख दी थी। रैली में गठबंधन की रमहा रैली से भी कम भीड़ उमड़ी थी। नीलम सोनकर के समर्थन में अंबारी में आयोजित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सभा में कुर्सियां तक खाली पड़ी थीं। स्थिति ये रही कि सभा में मंच पर ही नीलम सोनकर रो पड़ी थीं। पूरे चुनाव के दौरान भाजपा संगठन आजमगढ़ में निरहुआ का प्रचार करते नजर आ रहा था।लालगंज संसदीय सीट के कार्यकर्ता भी निरहुआ की सभाओं के लिए लगे थे। भाजपा जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह भी अपना 80 फीसदी समय आजमगढ़ लोकसभा सीट पर देते नजर आए। लालगंज सीट पर विधायक अरुणकांत यादव, पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह, ध्रुव सिंह और अहरौला क्षेत्र के कुछ पदाधिकारी ही नजर आ रहे थे। संभवत: इसकी शिकायत भी हाईकमान को गई थी। संगठन की बिखराव इस चुनाव में खुल कर सामने आया है। कई वरिष्ठ नेता तो अपना जनपद छोड़ दूसरे जिलों की कमान संभालते नजर आए। अब परिणाम सामने आ गए हैं। इसका खामियाजा भी संगठन के लोगों को उठाना है ये बात भी पदाधिकारी जानते हैं। फिलहाल वो दोनों ही सीटों पर भाजपा का वोट बढ़ने की बात कह अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं।
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हर बूथ पर मजबूत टीम का दावा, एजेंट कर पूरे नहीं बने
मतदान से पहले तक भाजपा के पदाधिकारी हर बूथ पर संगठित और मजबूत टीम के होने का दावा करते नजर आए। जब मतदान का दिन आया तो जनपद में 50 से ज्यादा बूथ ऐसे थे जहां भाजपा अपने एजेंट तक नहीं बना पाई थी। स्वयं जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह ने स्वीकार किया था कि 25 बूथ पर एजेंट नहीं थे। इससे भाजपा की चुनाव तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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देश में फिर से मोदी सरकार बनने पर जनता को बधाई। गठबंधन नहीं होता तो दोनों सीटों पर भाजपा को जीत मिलती। दोनों ही सीटों पर पार्टी के वोट बढ़े हैं। चुनाव में हार का कारण गठबंधन रहा है। - जयनाथ सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा