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भाषा एवं साहित्य राष्ट्र की पहचान
Updated Tue, 07 Nov 2017 11:38 PM IST
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आजमगढ़(ब्यूरो)। इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी के तत्वावधान में मंगलवार को हरिऔध नगर स्थित डा.श्रीनाथ सहायक के आवास पर% हिंदी दशा एवं दिशा’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन दीनानाथ लाल श्रीवास्तव की अध्यखता में किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ डा. कन्हैया सिंह ने कहा कि भाषाएं एवं साहित्य राष्ट्र की पहचान होती है।
उन्होंने कहा कि अगर इसकी समृद्धि होती है तो राष्ट्र भी समृद्ध होता है। हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिसमें दूसरी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की अद्भूत क्षमता है। आरएसएस के प्रांत कार्यवाहक डा.भगत सिंह ने कहा कि भाषा की अपनी विशिष्ट ताकत है। यदि हम उसे हृदय से अपनाने के लिए कृत संकल्पित होंगे तो वह उतनी ही निखरेगी। डा. अखिलेश चंद ने कहा कि राष्ट्रीयता की भावना का विकास हिंदी की समृद्धता से ही संभव है। डा. गीता सिंह ने राष्ट्रीय चेतना संवेदना का निर्माण केवल हिंदी साहित्य से ही संभव है। डा. कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि भाषा राष्ट्रीय जरुरते पूरी करने के साथ ही स्थाई रहती है। अध्यक्षता कर रहे दीनानाथ लाल श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कार, शालीनता और सद्भावना की जिननी हिंदी ही है। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षक श्री का पुरस्कार प्राप्त करने वाली डीएवी पीजी कालेज हिंदी विभागाध्यक्ष डा. गीता सिंह को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मोनित किया गया। इस मौके पर ओम प्रकाश पांडेय, गोविंद सिंह, संतोष कुमार, कार्तिकेय, हरिश्चंद, अभिषेक उपाध्याय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि अगर इसकी समृद्धि होती है तो राष्ट्र भी समृद्ध होता है। हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिसमें दूसरी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करने की अद्भूत क्षमता है। आरएसएस के प्रांत कार्यवाहक डा.भगत सिंह ने कहा कि भाषा की अपनी विशिष्ट ताकत है। यदि हम उसे हृदय से अपनाने के लिए कृत संकल्पित होंगे तो वह उतनी ही निखरेगी। डा. अखिलेश चंद ने कहा कि राष्ट्रीयता की भावना का विकास हिंदी की समृद्धता से ही संभव है। डा. गीता सिंह ने राष्ट्रीय चेतना संवेदना का निर्माण केवल हिंदी साहित्य से ही संभव है। डा. कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि भाषा राष्ट्रीय जरुरते पूरी करने के साथ ही स्थाई रहती है। अध्यक्षता कर रहे दीनानाथ लाल श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कार, शालीनता और सद्भावना की जिननी हिंदी ही है। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षक श्री का पुरस्कार प्राप्त करने वाली डीएवी पीजी कालेज हिंदी विभागाध्यक्ष डा. गीता सिंह को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मोनित किया गया। इस मौके पर ओम प्रकाश पांडेय, गोविंद सिंह, संतोष कुमार, कार्तिकेय, हरिश्चंद, अभिषेक उपाध्याय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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