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संगोष्ठी,
Updated Mon, 03 Jul 2017 11:59 PM IST
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आजमगढ़। चिंतन-विचार केंद्र के तत्वाधान में प्रगतिशील कवि डा. शम्भूनाथ सिंह की जन्मशताब्दी पर रविवार की शाम राहुल नगर में पं. अमरनाथ तिवारी की अध्यक्षता में संगोष्ठी हुई।
मुख्य अतिथि पं. सहदेव पांडेय सांकृत्यायन ने कहा कि डा. शंभूनाथ सिंह 1916 में देवरिया में पैदा हुए थे। वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ में हिंदी विभाग के व्याख्याता और अध्यक्ष रहते हुए हिन्दी गीत काव्य के एक सशक्त हस्ताक्षर बने। वह समीक्षक, पुराविद् के साथ अच्छे नाटककार भी थे। पं. अमरनाथ तिवारी ने कहा कि जिस शैली में डा. शंभूनाथ सिंह ने नवगीत लिखा वह हिंदी साहित्य में ‘मील का पत्थर’ है।
रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि डा. सिंह कवि सम्मेलनों के गीतकार नहीं थे। उन्होंने देश-प्रेम और राष्ट्रीयता को अपनी गीत का माध्यम बनाया। इस मौके पर डा. श्रीनाथ सहाय, विजयधारी पाण्डेय, निषीथ रंजन तिवारी, रवींद्र त्रिपाठी, जनमेजय पाठक मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि पं. सहदेव पांडेय सांकृत्यायन ने कहा कि डा. शंभूनाथ सिंह 1916 में देवरिया में पैदा हुए थे। वाराणसी संस्कृत विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ में हिंदी विभाग के व्याख्याता और अध्यक्ष रहते हुए हिन्दी गीत काव्य के एक सशक्त हस्ताक्षर बने। वह समीक्षक, पुराविद् के साथ अच्छे नाटककार भी थे। पं. अमरनाथ तिवारी ने कहा कि जिस शैली में डा. शंभूनाथ सिंह ने नवगीत लिखा वह हिंदी साहित्य में ‘मील का पत्थर’ है।
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रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि डा. सिंह कवि सम्मेलनों के गीतकार नहीं थे। उन्होंने देश-प्रेम और राष्ट्रीयता को अपनी गीत का माध्यम बनाया। इस मौके पर डा. श्रीनाथ सहाय, विजयधारी पाण्डेय, निषीथ रंजन तिवारी, रवींद्र त्रिपाठी, जनमेजय पाठक मौजूद रहे।
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