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ढांचे पर मान्यता लेने वालों की फेरहिस्त लंबी, खंगाले जा रहे रिकार्ड
Updated Wed, 07 Mar 2018 11:48 PM IST
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आजमगढ़। बिना जमीन, कमरों और अन्य व्यवस्थाओं के ही हाईस्कूल और इंटर की मान्यता लेने के मामले का खुलास अमर उजाला की ओर से करने के बाद डीआईओएस कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है। ऐसे कालेजों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। जिस नियम का हवाला देकर प्रबंधकों की ओर से कालेजों की मान्यता लेने की बात कही जा रही है वो नियम 1998 में बना था। तत्कालीन सरकार ने नियम के दुरुपयोग को देखते हुए इसे बंद कर दिया था। जनपद में बिना जमीन, कमरों और अन्य व्यवस्थाओं के लगभग 30 से 35 विद्यालयों के मान्यता लेने की बाते सामने आ रही है। इसमें एक तत्कालीन पटल सहायक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। डीआईओएस ने अब इस पर नजरें टेढ़ीं कर ली हैं।
तहबरपुर में स्व. विरई यादव बालिका इंटर कालेज को हाईस्कूल और रासेपुर के माता शनिचरा देवी इंटर कालेज को इंटरमीडिएट की मान्यता दी गई है। दोनों कालेजों की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षा में सेंटर बनाने के लिए अप्लाई किया गया था। दोनों कालेज की जांच में तहबरपुर में स्व. विरई यादव बालिका इंटर कालेज के नाम पर एक गड़ही में कुछ पिलर खड़े मिले थे। रासेपुर के माता शनिचरी देवी इंटर कालेज के नाम पर भी पिलर और दीवार खड़ी थी। बिना जमीन और व्यवस्था के ही नियमों को ताक पर रख कर विभाग की ओर से विद्यालयों को मान्यता दी गई थी। स्व. बिरई यादव बालिका इंटर कालेज के प्रबंधक देवनाथा यादव ने कालेज को धारा 9/4 के तहत मान्यता मिलने की बात कही थी। इसमें मानक कम होने पर कालेज को मान्यता दे दी जाती है। साथ ही एक वर्ष के तहत सभी मानकों को पूरा करना होता है। न करने पर मान्यता प्रत्याहरित कर ली जाती है। ये नियम 1998 में भाजपा की सरकार के दौरान बना था। इसी सरकार ने इसे खत्म भी कर दिया था। जबकि इन कालेजों को मान्यता अभी कुछ सालों पहले ही दी गई है। डीआईओए ने ऐसे कालेजों का रिकार्ड तलब किया है। सूत्रों की मानें तो जनपद में ऐसे 30 से 35 कालजों को मान्यता दी गई है। इसमें एक तत्कालीन पटल सहायक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। ये भी कहा जा रहा है कि मिलिभीगत से तत्कालीन डीआईओएस के फर्जी साइन भी किए गए थे। फिलहाल मामले की जांच होने की आशंका से विभाग के कर्मचारियों की नींद उड़ी हुई है। उधर, संबंधित प्रबंधकों में भी खलबली मची है। डीआईओएस डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि अभी जनपद से बाहर है। वापस आकर मामले की जानकारी की जाएगी।
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तहबरपुर में स्व. विरई यादव बालिका इंटर कालेज को हाईस्कूल और रासेपुर के माता शनिचरा देवी इंटर कालेज को इंटरमीडिएट की मान्यता दी गई है। दोनों कालेजों की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षा में सेंटर बनाने के लिए अप्लाई किया गया था। दोनों कालेज की जांच में तहबरपुर में स्व. विरई यादव बालिका इंटर कालेज के नाम पर एक गड़ही में कुछ पिलर खड़े मिले थे। रासेपुर के माता शनिचरी देवी इंटर कालेज के नाम पर भी पिलर और दीवार खड़ी थी। बिना जमीन और व्यवस्था के ही नियमों को ताक पर रख कर विभाग की ओर से विद्यालयों को मान्यता दी गई थी। स्व. बिरई यादव बालिका इंटर कालेज के प्रबंधक देवनाथा यादव ने कालेज को धारा 9/4 के तहत मान्यता मिलने की बात कही थी। इसमें मानक कम होने पर कालेज को मान्यता दे दी जाती है। साथ ही एक वर्ष के तहत सभी मानकों को पूरा करना होता है। न करने पर मान्यता प्रत्याहरित कर ली जाती है। ये नियम 1998 में भाजपा की सरकार के दौरान बना था। इसी सरकार ने इसे खत्म भी कर दिया था। जबकि इन कालेजों को मान्यता अभी कुछ सालों पहले ही दी गई है। डीआईओए ने ऐसे कालेजों का रिकार्ड तलब किया है। सूत्रों की मानें तो जनपद में ऐसे 30 से 35 कालजों को मान्यता दी गई है। इसमें एक तत्कालीन पटल सहायक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। ये भी कहा जा रहा है कि मिलिभीगत से तत्कालीन डीआईओएस के फर्जी साइन भी किए गए थे। फिलहाल मामले की जांच होने की आशंका से विभाग के कर्मचारियों की नींद उड़ी हुई है। उधर, संबंधित प्रबंधकों में भी खलबली मची है। डीआईओएस डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि अभी जनपद से बाहर है। वापस आकर मामले की जानकारी की जाएगी।
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