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अधिकारियों के खिलाफ बयान देने से भागे प्रधान और सचिव, भुगतेंगे खामियाजा

Wed, 21 Feb 2018 12:32 AM IST
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:32 AM IST
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अधिकारियों के खिलाफ बयान देने से भागे प्रधान और सचिव, भुगतेंगे खामियाजा
आजमगढ़। जैसा की अंदाजा था वही हुआ, जांच टीम के सामने प्रधानों और सचिवों के अधिकारियों का दबाव होने से इंकार करने के कारण इसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ेगा। चार हजार के सामान की 15 हजार कीमत चुकाने के मामले में भुगतान किए गए धन कि रिकवरी उनसे ही होगी। हालांकि प्रारंभिक जांच में पंचायती राज विभाग से जारी एक आदेश के आधार पर ही ये फर्जीवाड़ा होने की बात स्वीकारने वाले सीडीओ ने विवादित आदेश की फिर से जांच कराने की बात कही है।
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फूलपुर और पवई ब्लॉक के 87 ग्राम पंचायतों में प्रति सफाईकर्मी ट्राली और फावड़ा उपलब्ध कराने के नाम पर अंबेडकर नगर की एक फर्म से दो से तीन हजार के सामान 15 हजार रुपये वसूलने का खुलासा हुआ था। पांच फरवरी के अंक में भी अमर उजाला ने इसका खुलासा कर किया था। छह फरवरी को मुख्य विकास अधिकारी ने मामले में जांच बिठा दी थी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकस सिंह की अध्यक्षता में उपायुक्त उद्योग अनुराग यादव और डीआरडीए के अभियंता एनबी सिंह की टीम बनाई थी। सामान की पीडब्ल्यूडी के रेट से मिलान कर और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। जांच टीम ने प्रधानों और सचिवों के बयान लिए। इसके बाद रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार ये बताया गया है कि चार हजार के सामान की कीमत 15 हजार वसूले गए हैं। जांच टीम की मानें तो प्रधान और सचिव इस बात से मुकर गए कि किसी भी अधिकारी की ओर से उन पर दबाव बनाया गया था। हालांकि ये बात जरूर सामने आई है कि पंचायती राज विभाग से जारी एक आदेश का मतलब निकाल कर ही ये खरादारी हुई है। बयान से अधिकारियों और कर्मचारियों की गर्दन इस फर्जीवाड़े से साफ बचती नजर आ रही है। इन्हीं प्रधानों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया था कि ब्लॉक के अधिकारी ने इस आदेश का हवाला देकर इस खरीदारी के लिए दबाव बनाया था। सेक्रेटरी ने इसके एवज में उनसे चेक कटवाए थे। अब सेक्रेटरी और प्रधानों को ही भुगतान किए गए धन को अपने पास से चुकाना होगा। वहीं मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह की मानें तो आदेश में किसी फर्म विशेष से खरीदारी के लिए नहीं लिखा गया था, लेकिन सामान खरीदने के निर्देश दिए गए थे। विवादित आदेश की फिर से जांच कराई जाएगी।
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जांच रिपोर्ट मिली है। इसके प्रधान और सचिव की ओर से किसी दबाव से इंकार किया गया है। चूंकि कम कीमत का सामान ज्यादा दाम पर खरीदा गया था, इसलिए इसकी रिकवरी प्रधानों और सचिवों से की जाएगी। साथ ही विवादित आदेश की फिर से जांच कराई जाएगी। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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अभिषेक सिंह, सीडीओ
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