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Azamgarh News: रोज 100 रुपये, इलाज, नाश्ता और खाना मुफ्त, एनआरसी में नहीं भर्ती हो रहे अति कुपोषित बच्चे

Wed, 23 Jul 2025 01:04 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jul 2025 01:04 AM IST
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100 rupees per day, treatment, breakfast and food are free, severely malnourished children are not getting admitted in NRC
आजमगढ़। जिले में कुपोषण मुक्त अभियान अब पूरी तरह से पटरी से उतरता नजर आ रहा है। जिले में 1850 बच्चे अति गंभीर कुपोषण (सैम) से पीड़ित हैं जबकि 9981 बच्चे मध्यम कुपोषण (मैम) की श्रेणी में हैं। इसके बावजूद जिला मंडलीय चिकित्सालय में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में महज छह बच्चों को ही भर्ती किया गया है जो व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है।
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पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में जन्म से पांच साल तक के अति कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है। बच्चे के साथ रहने वाले परिवार के एक सदस्य को नाश्ते के साथ-साथ दोनों वक्त का खाना और 100 रुपये दिन के हिसाब से प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। यहां बच्चे का इलाज पूरी तरह मुफ्त होता है। इसके बावजूद अति कुपोषित बच्चे यहां नहीं पहुंच रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत सिंह ने बताया कि जिले में कुपोषित बच्चों को पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। बहुत से ऐसे परिवार हैं जो यहां नहीं आना चाहते हैं लेकिन विभाग प्रयास कर उन्हें यहां भर्ती कराता है ताकि बच्चों को यहां बेहतर इलाज मिले और देखभाल अच्छे से हो सके। पहले की अपेक्षा अब यहां सुधार हो रहा है।
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1850 बच्चों में से सिर्फ 6 भर्ती
अति कुपोषित बच्चों को सामान्य बच्चों की श्रेणी में लाने के लिए किए जा रहे प्रयास फिलहाल कागजी साबित हो रहे हैं। जमीनी हकीकत इससे इतर है। इसका अंदाजा इसी दिखता है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में वर्तमान में 1850 बच्चों को अति कुपोषित श्रेणी में चयनित किया गया है। मंडलीय जिला चिकित्सालय में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में सिर्फ छह बच्चे भर्ती हैं। ऐसे अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी तक पहुंचाने में विभाग के जिम्मेदार कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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14 दिन के लिए परिजन के साथ होते हैं भर्ती
कुपोषण मुक्त जिले की कल्पना के साथ मंडलीय जिला चिकित्सालय में कई साल पहले एनआरसी का संचालन शुरू किया गया था। गंभीर रूप से बीमार अति कुपोषित बच्चों को डॉक्टर के परामर्श पर एनआरसी में 14 दिन के लिए भर्ती किया जाता है। डॉक्टर लगातार बच्चों का चेकअप कर उन्हें जरूरी दवाओं के साथ-साथ पौष्टिक आहार देने की सलाह देते हैं। इसके लिए डायटीशियन की नियुक्ति की गई है। इसके बावजूद अति कुपोषित बच्चे एनआरसी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। वर्तमान में एनआरसी में सिर्फ छह अति कुपोषित बच्चे ही भर्ती हैं। नियमानुसार इन बच्चों को महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एनआरसी में भर्ती कराना चाहिए लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही से बच्चे एनआरसी तक नहीं पहुंच रहे हैं।



एक नजर में
पंजीकृत 0 से 6 वर्ष तक के बच्चे : 5,82,938
वजन किए गए बच्चे : 5,66,322
सैम (अति कुपोषित) बच्चे : 1,850
मैम (मध्यम कुपोषित) बच्चे : 9,981
गर्भवती महिलाएं : 42,016
धात्री महिलाएं : 21,444
जिले भर में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 1850 है। सीएचसी व पीएचसी पर भी कुपोषित बच्चों को देखा जाता है जो मरीज गंभीर होते हैं उन्हें यहां पर भर्ती किया जाता है। -डॉ. मुकेश साहनी, नोडल अधिकारी।
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