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Ayodhya News: शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाने का प्रयास करें प्रधानाचार्य
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12-प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय सम्मेलन में मौजूद अतिथि।-संवाद
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अयोध्या। प्रधानाचार्य अपने आचरण, व्यक्तित्व और कर्तव्य भावना को ऐसा बनाएं, जो अन्य के लिए प्रेरणा स्रोत हो। उन्होंने प्रधानाचार्य को शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाने, वार्षिक परीक्षाओं काे नियमित आयोजन करने और शिक्षा के संवर्धन के लिए भी प्रेरित किया। यह बातें अपर मुख्य सचिव माध्यमिक व बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहीं। वह शनिवार को रामायण विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के 47वें प्रांतीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि नियमित रूप से होने वाली परीक्षाओं का परिणाम बच्चों और अभिभावकों में साझा किया जाना जरूरी है। इससे उन्हें अपने शिक्षा के स्तर का पता चल सकेगा। पुरातन छात्रों को विद्यालय से जोड़े रखने की भी योजना बनाई जानी चाहिए। प्रोजेक्ट छात्र अलंकरण के जरिए रचनात्मक कार्य किया जाना चाहिए। अपर मुख्य सचिव ने सभागार में मौजूद प्रधानाचार्यों व अन्य से सामान्य ज्ञान से संबंधित कई प्रश्नोत्तर किए।
अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुशील सिंह ने परिषद की ओर से किए गए नवाचार की जानकारी दी। प्रधानाचार्यों के कार्यों में आ रही समस्याओं से अवगत कराया। सम्मेलन के समापन सत्र में हरि प्रसाद यादव, डॉ. देव भास्कर तिवारी, अनिल वशिष्ठ व दिवाकर शर्मा ने विभिन्न समितियों की ओर से लिए गए निर्णय और सुझावों को मुख्य अतिथि के सामने रखा। कोषाध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने विद्यालय संचालन में आ रही समस्याओं और उसके संभावित निदान पर अपनी बात रखी। इसके पहले एसएसवी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने संगीत अध्यापक अनिल मिश्र के निर्देशन में स्वस्तिवाचन, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भानु प्रताप सिंह, वरिष्ठ प्रांतीय संरक्षक श्रीनिवास शुक्ल, प्रांतीय महामंत्री रविंद्र त्रिपाठी, प्रांतीय संरक्षक डॉ. वीरेंद्र त्रिपाठी, तेज प्रताप सिंह, राम प्रिया शरण सिंह, प्रदीप वर्मा, डॉ. उदयभान सिंह, डॉ. रमेश मिश्र, सुनील द्विवेदी, डॉ. शिव कुमार मिश्र, जितेंद्र राव, वरुण प्रताप सिंह, रमेश चंद्र पांडेय, रामकृष्ण पांडेय, लवकुश सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, संजय सिंह व महमूद ए रहमान मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि नियमित रूप से होने वाली परीक्षाओं का परिणाम बच्चों और अभिभावकों में साझा किया जाना जरूरी है। इससे उन्हें अपने शिक्षा के स्तर का पता चल सकेगा। पुरातन छात्रों को विद्यालय से जोड़े रखने की भी योजना बनाई जानी चाहिए। प्रोजेक्ट छात्र अलंकरण के जरिए रचनात्मक कार्य किया जाना चाहिए। अपर मुख्य सचिव ने सभागार में मौजूद प्रधानाचार्यों व अन्य से सामान्य ज्ञान से संबंधित कई प्रश्नोत्तर किए।
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अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुशील सिंह ने परिषद की ओर से किए गए नवाचार की जानकारी दी। प्रधानाचार्यों के कार्यों में आ रही समस्याओं से अवगत कराया। सम्मेलन के समापन सत्र में हरि प्रसाद यादव, डॉ. देव भास्कर तिवारी, अनिल वशिष्ठ व दिवाकर शर्मा ने विभिन्न समितियों की ओर से लिए गए निर्णय और सुझावों को मुख्य अतिथि के सामने रखा। कोषाध्यक्ष डॉ. मणि शंकर तिवारी ने विद्यालय संचालन में आ रही समस्याओं और उसके संभावित निदान पर अपनी बात रखी। इसके पहले एसएसवी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने संगीत अध्यापक अनिल मिश्र के निर्देशन में स्वस्तिवाचन, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भानु प्रताप सिंह, वरिष्ठ प्रांतीय संरक्षक श्रीनिवास शुक्ल, प्रांतीय महामंत्री रविंद्र त्रिपाठी, प्रांतीय संरक्षक डॉ. वीरेंद्र त्रिपाठी, तेज प्रताप सिंह, राम प्रिया शरण सिंह, प्रदीप वर्मा, डॉ. उदयभान सिंह, डॉ. रमेश मिश्र, सुनील द्विवेदी, डॉ. शिव कुमार मिश्र, जितेंद्र राव, वरुण प्रताप सिंह, रमेश चंद्र पांडेय, रामकृष्ण पांडेय, लवकुश सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, संजय सिंह व महमूद ए रहमान मौजूद रहे।

12-प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय सम्मेलन में मौजूद अतिथि।-संवाद
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