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सत्संग के बिना विवेक की आंखों का पर्दा नहीं खुलता

Thu, 15 Jan 2015 12:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया Updated Thu, 15 Jan 2015 12:57 AM IST
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Without the veil of discretion not open the eyes of Discourses

ग्राम मुड़ैना रामदत्त में आज पंडाल का वातावरण उल्लास से भर गया, जब जगदगुरु रामभद्राचार्य के 66 वें जन्मदिवस पर उन्हें इतने किलो वजनी माला पहनाई गई। यही नहीं भक्ताें ने उन्हें फलों से तौला । 66 किलो का केक काटकर प्रसाद में वितरण किया गया।

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जगदगुरु रामभद्राचार्य ने कथा के तीसरे दिन मकर संक्रांति पर्व के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दिन मोक्ष दायिनी गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। सत्संग की महिमा के  बारे में प्रकाश डालते हुए तुलसी पीठास्वर ने कहा कि सत्संग के बिना विवेक की आंखों का पर्दा नहीं खुलता है।
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संगीत के मर्मज्ञ मनीषी कविकुल रत्न रामभद्राचार्य जी के संगीत मय भक्ति गीतों पर पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रृद्धालु मातृ शक्ति जब भजनों पर झूमी, तब पंडाल की अद्भुत छठा देखकर हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। इस दौरान आयोजक कौशल किशोर त्रिपाठी, अनिल त्रिपाठी, सुशील त्रिपाठी, रंजना त्रिपाठी मौजूद रहे ।
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