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Auraiya News: सेंगर नदी का जलस्तर फिर बढ़ा, सैकड़ों बीघा धान-बाजरा की फसल जलमग्न
Fri, 11 Sep 2026 11:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:59 PM IST
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सेंगर नदी का जलस्तर देखते एसडीएम व अन्य। स्रोत: प्रशासन
अछल्दा। लगातार हो रही बारिश से सेंगर नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसको देखते हुए एसडीएम ने निरीक्षण कर स्थिति देखी।
महेवा मार्ग से चिमकुनी गांव के पास से निकली सेंगर नदी उफान पर है। नदी के बढ़ते जलस्तर से किनारे के खेतों में खड़ी धान और बाजरा की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। ग्रामीण अनुज सिंह, सुभाष तिवारी ने बताया कि चार सितंबर को जलस्तर घटने से किसानों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन शुक्रवार को दोबारा जलस्तर बढ़ने से खेतों में खड़ी फसल फिर से डूब गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह जलस्तर बना रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी, जिससे खाने के भी लाले पड़ जाएंगे। वहीं, नदी के किनारे बना शवदाह गृह भी पानी की चपेट में आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई अनहोनी हो जाती है तो अंतिम संस्कार के लिए भी भारी दिक्कत होगी। इसके अलावा नदी के बगल में बने मंदिर के आसपास की जमीन और मेला मैदान भी धीरे-धीरे जलमग्न हो रहा है। सूचना पर उपजिलाधिकारी बिधूना कमल सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निगरानी के निर्देश दिए।
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महेवा मार्ग से चिमकुनी गांव के पास से निकली सेंगर नदी उफान पर है। नदी के बढ़ते जलस्तर से किनारे के खेतों में खड़ी धान और बाजरा की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। ग्रामीण अनुज सिंह, सुभाष तिवारी ने बताया कि चार सितंबर को जलस्तर घटने से किसानों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन शुक्रवार को दोबारा जलस्तर बढ़ने से खेतों में खड़ी फसल फिर से डूब गई है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह जलस्तर बना रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी, जिससे खाने के भी लाले पड़ जाएंगे। वहीं, नदी के किनारे बना शवदाह गृह भी पानी की चपेट में आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई अनहोनी हो जाती है तो अंतिम संस्कार के लिए भी भारी दिक्कत होगी। इसके अलावा नदी के बगल में बने मंदिर के आसपास की जमीन और मेला मैदान भी धीरे-धीरे जलमग्न हो रहा है। सूचना पर उपजिलाधिकारी बिधूना कमल सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निगरानी के निर्देश दिए।
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