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अधिकारियों के घरों और दफ्तरों की शोभा बढ़ा रहे सफाई कर्मी
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औरैया। ग्रामीण स्वच्छता मिशन कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतों में साफ सफाई व्यवस्था दुरुस्त नजर नहीं आ रही है। सफाई न होने से गांव की गलियां कीचड़ से पटी हैं, साथ ही जलभराव भी है। इससे ग्रामीणों को आवाजाही में खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। इसकी वजह यह सामने आ रही है कि जिले में 821 सफाई कर्मचारियों में से 60 कर्मचारी कलक्ट्रेट, विकास भवन व अधिकारियों के दफ्तरों में अस्थायी रूप से संबद्ध हैं। इससे सफाई व्यवस्था को पलीता लग रहा है।
तत्कालीन बसपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिले में 841 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की थी। इन सफाई कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों के अलावा किसी अन्य कार्यालय से संबद्ध नहीं करने का शासनादेश भी जारी किया गया था।
लेकिन इनमें से तकरीबन 60 सफाईकर्मी कलक्ट्रेट, कैंप कार्यालय, एडीएम विकास भवन, सीडीओ, पीडी, डीडीओ, डीपीआरओ आदि कार्यालयों से संबद्ध हैं। सूत्रों के मुताबिक कलक्ट्रेट, विकास भवन के विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की क्षमता अनुसार उनसे काम लिया जा रहा है। कलक्ट्रेट और विकास भवन में कई सफाई कर्मचारियों से कंप्यूटर ऑपरेटर तक का काम लिया जा रहा है।
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यही नहीं तीन-चार सफाई कर्मचारी दूसरे जिलों में भी अस्थायी रूप से संबद्ध हैं। उधर, इस संबंध में डीपीआरओ राजेश चौरसिया का कहना है कि उन्हें जिले में आए दो महीने हुआ है। सफाई कर्मचारियों के संबद्ध होने के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर वह प्रयासरत हैं। शीघ्र इस संबंध में डीएम से वार्ता करेंगे और सफाई कर्मचारियों को उनके तैनाती वाले स्थानों पर भेजा जाएगा।
जिले में 771 राजस्व ग्राम हैं। जिनमें तीन सैकड़ा से अधिक ऐसे राजस्व ग्राम हैं जिनकी आबादी ज्यादा है। इसके बाद भी यहां पर एक सफाई कर्मी की नियुक्ति है। इससे सफाई का काम प्रभावित हो रहा है। सदर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत शहबदिया, चिरुहूली, पैंगबरपुर समेत दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां जलभराव व गंदगी सड़कों पर फैली रहती है। जानकारी के मुताबिक जिले में 477 ग्राम पंचायत व 771 राजस्व ग्राम हैं। इनके बीच कुल 821 सफाई कर्मचारी हैं।
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तत्कालीन बसपा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिले में 841 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की थी। इन सफाई कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों के अलावा किसी अन्य कार्यालय से संबद्ध नहीं करने का शासनादेश भी जारी किया गया था।
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लेकिन इनमें से तकरीबन 60 सफाईकर्मी कलक्ट्रेट, कैंप कार्यालय, एडीएम विकास भवन, सीडीओ, पीडी, डीडीओ, डीपीआरओ आदि कार्यालयों से संबद्ध हैं। सूत्रों के मुताबिक कलक्ट्रेट, विकास भवन के विभिन्न कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों की क्षमता अनुसार उनसे काम लिया जा रहा है। कलक्ट्रेट और विकास भवन में कई सफाई कर्मचारियों से कंप्यूटर ऑपरेटर तक का काम लिया जा रहा है।
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यही नहीं तीन-चार सफाई कर्मचारी दूसरे जिलों में भी अस्थायी रूप से संबद्ध हैं। उधर, इस संबंध में डीपीआरओ राजेश चौरसिया का कहना है कि उन्हें जिले में आए दो महीने हुआ है। सफाई कर्मचारियों के संबद्ध होने के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर वह प्रयासरत हैं। शीघ्र इस संबंध में डीएम से वार्ता करेंगे और सफाई कर्मचारियों को उनके तैनाती वाले स्थानों पर भेजा जाएगा।
जिले में 771 राजस्व ग्राम हैं। जिनमें तीन सैकड़ा से अधिक ऐसे राजस्व ग्राम हैं जिनकी आबादी ज्यादा है। इसके बाद भी यहां पर एक सफाई कर्मी की नियुक्ति है। इससे सफाई का काम प्रभावित हो रहा है। सदर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत शहबदिया, चिरुहूली, पैंगबरपुर समेत दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां जलभराव व गंदगी सड़कों पर फैली रहती है। जानकारी के मुताबिक जिले में 477 ग्राम पंचायत व 771 राजस्व ग्राम हैं। इनके बीच कुल 821 सफाई कर्मचारी हैं।