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हिंदुस्तानियों के बच्चों पर था पढ़ाई का प्रतिबंध

Mon, 10 Aug 2015 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Mon, 10 Aug 2015 12:29 AM IST
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tudies on children was banned for Indians

शिक्षा है अनमोल रतन, पढने का सब करो जतन, आजाद औरैया में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भवन में कभी हिंदुस्तानियों के लिए शिक्षा कैद रहा करती थी। क्या, आपको यकीन नहीं हो रहा है, लेकिन यह सच है। अंग्रेजी शासन काल में डीआईओएस कार्यालय भवन में गोरों का ब्रिटिश तहसील स्कूल संचालित था।

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आज भी यह भवन शिक्षा के गुलाम होने की गवाही दे रहा है।


 
पुरानी कलेक्ट्रेट भवन और वर्तमान में जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला सूचना कार्यालय, निझाई पुलिस चौकी और जिला पूर्ति कार्यालय भवन परतंत्र औरैया में ब्रिटिश तहसील भवन के नाम से जाना जाता था। अंग्रेजों ने इस भवन का निर्माण वर्ष 1903 में कराया था।
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इस भवन में ब्रिटिश सैनिकों के बच्चे को शिक्षा दी जाती थी। गुलाम भारत में हिंदुस्तानियों और उनके बच्चों को हेय दृष्टि से देखा जाता था। शायद यही कारण था कि ब्रिटिश हुकूमत ने इस स्कूल में हिंदुस्तानी बच्चों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था।
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इस बारे में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय शंकर गुप्ता अपने बचपन के क्षणों को याद करते बताते हैं कि बचपन पिताजी उन्हें ब्रिटिश तहसील स्कूल के किस्से सुनाया करते थे। कहते थे कि इस स्कूल परिसर में किसी हिंदुस्तानी के प्रवेश पर प्रतिबंध था।


इसके लिए गोरों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर  इंडियंस आर नॉट एलाउड की पट्टिका लगा रखी थी। गुप्ता ने बताया कि ब्रिटिश शैली में बने इस स्कूल भवन परिसर में भारतीयों के लिए शिक्षा कैद रहा करती थी।


यही कारण था उस जमाने में लोग रसूखदार घरानों के बच्चे ही पढ़ पाते थे। पुरानी कलेक्ट्रेट का ताजपोशी के चलते यह भवन आज अपना स्वरूप बचाने में कामयाब रहा है।




अनोखा संयोग- ब्रिटिश शासन में तहसील स्कूल भवन में भले ही भारतीयों के लिए शिक्षा कैद रही हो, लेकिन यह अनोखा संयोग ही है कि 21 सदी में यह भवन शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। जिला बनने से पहले इस भवन में सरकारी मिडिल स्कूल संचालित रहा है।



जिला सृजन के बाद इस भवन को कलेक्ट्रेट भवन का स्वरूप दे दिया गया। जिला मुख्यालय भवन के निर्माण के बाद इस भवन में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय तथा इसके परिसर में ब्लाक संसाधन केंद्र संचालित है।

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