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Auraiya News: आज हल छठ पर उपवास व पूजन कर महिलाएं करेंगी संतान के सुख समृद्धि की कामना
Tue, 01 Sep 2026 11:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:59 PM IST
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सुभाष चौक में ठेले पर पूजन सामग्री खरीदती महिलाएं। संवाद
औरैया। हिंदू धर्म में हल छठ या हल षष्ठी का विशेष महत्व है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में हलछठ व बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था। उनका प्रमुख अस्त्र हल था, इसलिए इस पर्व का नाम हल षष्ठी पड़ा। इस पूजन के लिए मंगलवार को सुभाष चौक के पास लगने वाले बाजार में महिलाएं खरीदारी करती नजर आईं।
हल छठ के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। आचार्य वीरेंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार हरछठ का व्रत बुधवार को रखा जाएगा। पूजन में दूध, दही, घी, गोबर, फल, फूल, मिट्टी के छोटे कुल्हड़, ज्वार की धानी, चावल, भुना हुआ चना, सात प्रकार के अनाज, लाल चंदन, हल्दी नया वस्त्र, जनेऊ व कुश प्रयोग किया जाता है। उपवास रखते हुए महिलाओं को यह पूजन करना होगा।
इस तरह होता हल छठ पूजन
आचार्य वीरेंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि व्रती महिलाएं पूजा स्थल पर भैंस के गोबर से दीवार पर हल छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान से संबंधित आकृतियां बनाएं। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें। हल छठ के व्रत में जोती या बोई गई फसल से प्राप्त अनाज, फल व सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। दूध और उससे बने दही का सेवन करने की परंपरा है।
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हल छठ के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। आचार्य वीरेंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार हरछठ का व्रत बुधवार को रखा जाएगा। पूजन में दूध, दही, घी, गोबर, फल, फूल, मिट्टी के छोटे कुल्हड़, ज्वार की धानी, चावल, भुना हुआ चना, सात प्रकार के अनाज, लाल चंदन, हल्दी नया वस्त्र, जनेऊ व कुश प्रयोग किया जाता है। उपवास रखते हुए महिलाओं को यह पूजन करना होगा।
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इस तरह होता हल छठ पूजन
आचार्य वीरेंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि व्रती महिलाएं पूजा स्थल पर भैंस के गोबर से दीवार पर हल छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान से संबंधित आकृतियां बनाएं। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें। हल छठ के व्रत में जोती या बोई गई फसल से प्राप्त अनाज, फल व सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। दूध और उससे बने दही का सेवन करने की परंपरा है।
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