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‘न्याय की लकीर’: सिर उठाकर पहुंचे थे कोर्ट, सजा सुनते ही ढहा गुरूर, 317 पेज ने धुला पुलिस का दाग, पढ़ें डिटेल

Thu, 20 Aug 2026 01:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो विवेक सिकरवार, अमर उजाला, औरैया
विवेक सिकरवार, अमर उजाला, औरैया Updated Thu, 20 Aug 2026 01:28 AM IST
सार

Auraiya News: औरैया के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में बुधवार को कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक और उनके भाई संतोष पाठक समेत अन्य दोषियों को सजा सुनाई। 317 पेज के इस फैसले ने न केवल दोषियों के रसूख को जमींदोज किया, बल्कि पुलिस की निष्पक्ष जांच पर लगे दाग को भी धो दिया।

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Auraiya Double Murder and  Triumph of Justice Convicts Headed Straight to the Lock up with Heads Bowed
Auraiay Double Murder Case - फोटो : amar ujala

विस्तार

औरैया दोहरे हत्याकांड में बुधवार को अदालत का फैसला आते ही दोषियों के तेवर पस्त हो गए। फैसले से पहले कचहरी परिसर स्थित हवालात से सभी आरोपियों को जब कोर्ट रूम लाया गया, तब कमलेश के चेहरे पर उदासी थी, तो संतोष पाठक के चेहरे पर ठसक झलक रही थी। भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा बल उन्हें पीछे के रास्ते से न्यायाधीश विनय प्रकाश के सामने लेकर आए, लेकिन दोपहर बाद जैसे ही सजा का ऐलान हुआ, दोषियों का सारा गुरूर ढह गया।

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कोर्ट का रुख सख्त देख कोई किसी से नजर मिलाने की हिम्मत नहीं जुटा सके और सभी सिर झुकाए खड़े रहे। इसके बाद जब दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें कोर्ट रूम से दोबारा हवालात ले जाया गया। सामान्य दिनों में कैदी वाले वाहन को बाहर खड़ा कर लिया जाता है, लेकिन भीड़ को देखते हुए वाहन को कचहरी परिसर के अंदर ले जाया गया। जैसे ही एक-एक कर वाहन बाहर निकले तो उनके मायूस समर्थक हाथ जोड़ते दिखाई दिए, लेकिन कमलेश से लेकर अन्य दोषियों ने एक बार भी उनकी तरफ नहीं देखा।

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कोर्ट में वीडियो भी डिजिटल साक्ष्य के तौर पर दिया गया था
इसके बाद सभी दोषियों को सदर कोतवाली स्थित अंगुष्ठछाप कक्ष ले जाया गया। वहां भी उनके समर्थकों की भीड़ देखने को मिली। एक-एक कर सभी के अंगूठे के निशान फिंगरप्रिंट दर्ज किए गए। इसके बाद जो जिस जेल से आया था उसे वहीं भेज दिया गया, जबकि जमानत पर बाहर चल रहे कमलेश पाठक के सरकारी गनर अवनीश प्रताप सिंह को इटावा जेल भेज दिया गया। वादी पक्ष का कहना है कि अवनीश ने मौके पर मारपीट में भाग लिया और अपना शस्त्र भी कमलेश पाठक को दे दिया था। इसका वीडियो कोर्ट में भी डिजिटल साक्ष्य के तौर पर दिया गया था।

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317 पेज की सजा ने धुला पुलिस पर लगा दाग
शहर में जिस समय मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन की गोली मारकर हत्या की गई थी, उस समय कोतवाली पुलिस मौके पर ही थी। पुलिस के सामने ही दोषियों ने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद पुलिस पर भी दाग लगा था। बुधवार को कोर्ट ने 317 पेज का निर्णय सुनाया। इसके साथ ही पुलिस के वह दाग भी मिट गए।

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दोहरे हत्याकांड के बाद जब्त कर ली गई थी 53 करोड़ की संपत्ति
शहर के दोहरे हत्याकांड के बाद जिले में सनसनी फैल गई थी। इसके बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया। बाद में दोषी पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के भाई संतोष पाठक की आवास विकास स्थित संपत्ति को कुर्क करते हुए जब्त कर लिया गया था। पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक की औरैया में ही नहीं, आसपास जिले कानपुर देहात, इटावा, जालौन, कानपुर नगर सहित अन्य जिले में भी अच्छी खासी पकड़ थी। जिस भी जिले में वह जाते थे तो सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक खड़े हो जाते थे।

दो दोषी कॉलेज में थे सरकारी कर्मी
गैंगस्टर के मामले में दोषी कुलदीप अवस्थी फफूंद स्थित राधाबल्लभ इंटर कॉलेज में लिपिक और आशीष दुबे चपरासी थे। दोहरे हत्याकांड के कुछ साल पहले ही उन्हें नौकरी मिली थी, बताया जा रहा है कि नौकरी दिलवाने में भी पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक का बड़ा हाथ था। फैसले के बाद पैरोकार अनूप कुमार की भी सजा दिलाने में अहम भूमिका रही। लगातार छह साल से पैरवी कर रहे अनूप को भी फैसले का इंतजार था। फैसला आते ही उन्होंने भी सुकून की सांस ली।

पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए अदालत के समक्ष ठोस साक्ष्य और मजबूत गवाह प्रस्तुत किए। मजबूत पैरवी के कारण ही दोषियों को सजा मिली है। जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ पुलिस की यह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।  -अभिषेक भारती

टाइम लाइन

  • दोहरा हत्याकांड: 15 मार्च 2020
  • कोर्ट ने लिया संज्ञान: 12 जून 2020
  • कोर्ट में सुनवाई: 20 जनवरी 2021
  • फैसला: 19 अगस्त 2026
  • गैंगस्टर की कार्रवाई: 11 जुलाई 2020
  • कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र: 29 जून 2021
  • कोर्ट ने लिया संज्ञान: 12 अगस्त 2021
  • कोर्ट में सुनवाई: 16 नवंबर 2021
  • फैसला: 24 मार्च 2026
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