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Auraiya News: नारद मोह की लीला के साथ शुरू हुआ रामलीला का मंचन
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रुरुगंज। कुदरकोट कस्बा में 124 वें रामलीला व दशहरा महोत्सव का रविवार रात आयोजन शुरू हो गया। महिला थानाध्यक्ष पूजा सोलंकी ने दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद फीता काटकर रामलीला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि रामलीला से जीवन जीने की सीख मिलती है।
इसके बाद नारद मोह की लीला का मंचन शुरू हुआ। जिसमें पात्रों ने मंचन करते हुए दर्शाया कि नारदजी ने एक आश्रम में जन्म लिया। उनकी मां उस आश्रम की सेविका थी। ऋषि-महर्षियों के संग ने उनके मन में छुपी हुई आध्यात्मिक जिज्ञासा को जगा दिया और वह भी योग के रास्ते पर चल पड़े। एक दिन नारदजी और भगवान विष्णु साथ-साथ वन में जा रहे थे कि अचानक विष्णुजी एक वृक्ष के नीचे थककर बैठ गए।
बोले भई नारदजी कहीं से पानी मिल जाए तो लाओ। हमारा तो गला सूख रहा है। नारद जी तुरंत सावधान हो गए। उनके होते हुए भला भगवान प्यासे रहें। वह बोले भगवान अभी लाया, आप थोड़ी देर प्रतीक्षा करें। नारदजी एक ओर दौड़ लिए। उनके जाते ही भगवान मुस्कराए और अपनी माया को नारद जी को सत्य के मार्ग पर लाने का आदेश दिया।
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इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशाराम तिवारी, लालजी दीक्षित, नागेंद्र मिश्रा, गुड्डू दीक्षित, संजय बाथम, सोम मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, गौरव शुक्ला समेत कई लोग व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
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इसके बाद नारद मोह की लीला का मंचन शुरू हुआ। जिसमें पात्रों ने मंचन करते हुए दर्शाया कि नारदजी ने एक आश्रम में जन्म लिया। उनकी मां उस आश्रम की सेविका थी। ऋषि-महर्षियों के संग ने उनके मन में छुपी हुई आध्यात्मिक जिज्ञासा को जगा दिया और वह भी योग के रास्ते पर चल पड़े। एक दिन नारदजी और भगवान विष्णु साथ-साथ वन में जा रहे थे कि अचानक विष्णुजी एक वृक्ष के नीचे थककर बैठ गए।
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बोले भई नारदजी कहीं से पानी मिल जाए तो लाओ। हमारा तो गला सूख रहा है। नारद जी तुरंत सावधान हो गए। उनके होते हुए भला भगवान प्यासे रहें। वह बोले भगवान अभी लाया, आप थोड़ी देर प्रतीक्षा करें। नारदजी एक ओर दौड़ लिए। उनके जाते ही भगवान मुस्कराए और अपनी माया को नारद जी को सत्य के मार्ग पर लाने का आदेश दिया।
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इस मौके पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशाराम तिवारी, लालजी दीक्षित, नागेंद्र मिश्रा, गुड्डू दीक्षित, संजय बाथम, सोम मिश्रा, अभिषेक मिश्रा, गौरव शुक्ला समेत कई लोग व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे रहे।