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Auraiya News: बाढ़ से घिरे अस्ता गांव की नहीं बदली किस्मत
Fri, 01 Aug 2025 11:49 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:49 PM IST
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अस्ता गांव में घुसे बाढ़ के पानी के बीच ग्रामीण।
- फोटो : अस्ता गांव में घुसे बाढ़ के पानी के बीच ग्रामीण।
औरैया। समय बदला, व्यवस्था बदली, लेकिन बीहड़ी के अस्ता गांव की तस्वीर नहीं बदली। यह वही गांव है जहां 26 मई 1984 की रात दस्यु गैंग ने 20 लोगों को लाइन में खड़े कर गोलियों से भून दिया था। इनमें 14 की मौत हुई थी। अब यहां डकैत तो नहीं हैं, लेकिन यमुना नदी की बाढ़ हर साल इस गांव में तबाही मचाती है।
अस्ता गांव सदर तहसील की यमुना पट्टी पर बसा है। इस गांव में 200 से अधिक घर हैं। मल्लाह जाति के लोगों की आबादी अधिक है। गांव के लोगों की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी, पशुपालन व खेती-बाड़ी है। शहर से इस गांव की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। यहां 1996 में पहली बार यमुना की बाढ़ ने तबाही मचाई थी। तब पूरा गांव बाढ़ के पानी से घिर गया था। दर्जनों कच्चे घर ढह गए थे। झोपड़ियां बह गई थीं। कई मवेशी मौत का शिकार हुए थे।
इसके बाद गांव में जीवन पटरी पर लौटने लगा था। ग्रामीण खेती-बाड़ी व पशुपालन के दम पर जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन 2019 से हर साल कोटा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी से यह गांव बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। छह साल से इस गांव में बाढ़ तबाही मचा कर चली जाती है। 28 जुलाई से यह गांव फिर भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। गांव की गलियों में पानी भरा है। निचले स्थानों पर बने घर पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। कई परिवार पलायन कर गए हैं। कुछ घरों के लोग छतों पर डेरा जमाए हैं।
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गांव जाने वाले रास्तों पर नाव डाली गई है। गांव के मंगल सिंह व अरविंद बताते हैं कि साल भर खेती किसानी व मजदूरी से जो कमाते हैं। बाढ़ आने पर सब चौपट हो जाता है। उनका गांव तलहटी में बसा है। इस गांव को ऊंचे स्थान पर बसाने के लिए वर्ष 2022 में आदेश दिए गए थे। इसके लिए वन विभाग को जगह उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई।
कुसुमा नाइन गैंग ने बदला लेने के लिए यहां किया था नरसंहार
गौरतलब है कि अस्ता गांव 26 मई 1984 को चर्चा में आया था। तब दस्यु लालाराम, श्रीराम व दस्यु कुसुमा नाइन गैंग ने बेहमई नरसंहार का बदला लेने के लिए यहां नरसंहार किया था। गैंग ने मल्लाह जाति के 20 लोगों को लाइन में खड़ाकर गोलियों से भून दिया था। इनमें 14 लोगों ने दम तोड़ दिया था। छ लोग जो बचे थे, उनमें किसी की आंख की रोशनी चली गई थी, तो कोई हाथ-पैर से अपाहिज हो गया । तब तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्रा भी गांव आए थे।
वन विभाग की तरफ से प्रक्रिया जारी
सदर एसडीएम राकेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में इस गांव को ऊंचे स्थान पर बसाने के आदेश दिए गए थे। वन विभाग के द्वारा इसकी प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग जल्द प्रक्रिया पूरा होने का प्रयास कर रहा है। इससे उम्मीद है कि अगले साल बाढ़ आने की स्थिति से पहले गांव को ऊंचे स्थान पर बसा दिया जाएगा।
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अस्ता गांव सदर तहसील की यमुना पट्टी पर बसा है। इस गांव में 200 से अधिक घर हैं। मल्लाह जाति के लोगों की आबादी अधिक है। गांव के लोगों की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी, पशुपालन व खेती-बाड़ी है। शहर से इस गांव की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। यहां 1996 में पहली बार यमुना की बाढ़ ने तबाही मचाई थी। तब पूरा गांव बाढ़ के पानी से घिर गया था। दर्जनों कच्चे घर ढह गए थे। झोपड़ियां बह गई थीं। कई मवेशी मौत का शिकार हुए थे।
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इसके बाद गांव में जीवन पटरी पर लौटने लगा था। ग्रामीण खेती-बाड़ी व पशुपालन के दम पर जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन 2019 से हर साल कोटा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी से यह गांव बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है। छह साल से इस गांव में बाढ़ तबाही मचा कर चली जाती है। 28 जुलाई से यह गांव फिर भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। गांव की गलियों में पानी भरा है। निचले स्थानों पर बने घर पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। कई परिवार पलायन कर गए हैं। कुछ घरों के लोग छतों पर डेरा जमाए हैं।
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गांव जाने वाले रास्तों पर नाव डाली गई है। गांव के मंगल सिंह व अरविंद बताते हैं कि साल भर खेती किसानी व मजदूरी से जो कमाते हैं। बाढ़ आने पर सब चौपट हो जाता है। उनका गांव तलहटी में बसा है। इस गांव को ऊंचे स्थान पर बसाने के लिए वर्ष 2022 में आदेश दिए गए थे। इसके लिए वन विभाग को जगह उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई।
कुसुमा नाइन गैंग ने बदला लेने के लिए यहां किया था नरसंहार
गौरतलब है कि अस्ता गांव 26 मई 1984 को चर्चा में आया था। तब दस्यु लालाराम, श्रीराम व दस्यु कुसुमा नाइन गैंग ने बेहमई नरसंहार का बदला लेने के लिए यहां नरसंहार किया था। गैंग ने मल्लाह जाति के 20 लोगों को लाइन में खड़ाकर गोलियों से भून दिया था। इनमें 14 लोगों ने दम तोड़ दिया था। छ लोग जो बचे थे, उनमें किसी की आंख की रोशनी चली गई थी, तो कोई हाथ-पैर से अपाहिज हो गया । तब तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्रा भी गांव आए थे।
वन विभाग की तरफ से प्रक्रिया जारी
सदर एसडीएम राकेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में इस गांव को ऊंचे स्थान पर बसाने के आदेश दिए गए थे। वन विभाग के द्वारा इसकी प्रक्रिया चल रही है। वन विभाग जल्द प्रक्रिया पूरा होने का प्रयास कर रहा है। इससे उम्मीद है कि अगले साल बाढ़ आने की स्थिति से पहले गांव को ऊंचे स्थान पर बसा दिया जाएगा।