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देख सुदामा की दीन दशा...
ब्यूरो/ अमर उजाला, औरैया
Updated Mon, 16 Mar 2015 11:30 PM IST
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ग्राम दौलतपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम
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दिन कथा मंडप में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। इस दौरान फूलों की होली से
पूरा कथा परिसर वृंदावन मय हो गया। भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य राधारमण
ठाकुर ने श्रद्धालुओं को कृष्ण और सुदामा की कथा का मार्मिक वर्णन सुनाया।
आचार्य राधारमण ठाकुर ने कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा जन्म से ही गरीब ब्राह्मण थे। कृष्ण और सुदामा की दोस्ती आज पूरे संसार के लिए एक मिसाल है।
कहा कि गरीबी की हालत में जब सुदामा पत्नी के बार-बार कहने पर जब भगवान कृष्ण से मदद लेने द्वारिका पहुंचे तो उनकी दीन दशा देखकर पहले तो द्वारपालों ने उन्हें भगवान कृष्ण से नहीं मिलने दिया लेकिन उनके लाख कहने पर जब द्वारपालों ने भगवान कृष्ण को सुदामा के आने की सूचना दी तो सुदामा नाम सुनते ही भगवान कृष्ण अपनी सुध बुध खोकर नंगे पैर ही महल के गेट की तरफ दौड़ पड़े।
सुदामा को देखते ही कृष्ण ने उन्हें अपने गले से लगा लिया। सुदामा की दीन दशा देखकर भगवान कृष्ण की आखों से अश्रुधार झर-झर बहने लगी। आचार्य श्री ठाकुर ने बताया कि सच्ची दोस्ती वही होती है जिसमें गरीबी और अमीरी का अंतर नहीं होता।
लेकिन आज के दौर में कोई किसी का तब तक दोस्त होता है जब तक उसकी जेब पैसों से भरी रहती है। लेकिन जब उसकी जेब खाली हो जाती है तो उसकी मदद को कोई भी आगे नहीं आता। कथा मंडप में फूलों की होली का कार्यक्रम किया गया। चारों तरफ फूलों की वर्षा की गई।
कथा आयोजक मुकुट सिंह कुशवाह ने क्षेत्र की श्रद्धालु जनता से 17 मार्च को होने वाले हवन एवं भंडारा कार्यक्रम में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।
आचार्य राधारमण ठाकुर ने कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा जन्म से ही गरीब ब्राह्मण थे। कृष्ण और सुदामा की दोस्ती आज पूरे संसार के लिए एक मिसाल है।
कहा कि गरीबी की हालत में जब सुदामा पत्नी के बार-बार कहने पर जब भगवान कृष्ण से मदद लेने द्वारिका पहुंचे तो उनकी दीन दशा देखकर पहले तो द्वारपालों ने उन्हें भगवान कृष्ण से नहीं मिलने दिया लेकिन उनके लाख कहने पर जब द्वारपालों ने भगवान कृष्ण को सुदामा के आने की सूचना दी तो सुदामा नाम सुनते ही भगवान कृष्ण अपनी सुध बुध खोकर नंगे पैर ही महल के गेट की तरफ दौड़ पड़े।
सुदामा को देखते ही कृष्ण ने उन्हें अपने गले से लगा लिया। सुदामा की दीन दशा देखकर भगवान कृष्ण की आखों से अश्रुधार झर-झर बहने लगी। आचार्य श्री ठाकुर ने बताया कि सच्ची दोस्ती वही होती है जिसमें गरीबी और अमीरी का अंतर नहीं होता।
लेकिन आज के दौर में कोई किसी का तब तक दोस्त होता है जब तक उसकी जेब पैसों से भरी रहती है। लेकिन जब उसकी जेब खाली हो जाती है तो उसकी मदद को कोई भी आगे नहीं आता। कथा मंडप में फूलों की होली का कार्यक्रम किया गया। चारों तरफ फूलों की वर्षा की गई।
कथा आयोजक मुकुट सिंह कुशवाह ने क्षेत्र की श्रद्धालु जनता से 17 मार्च को होने वाले हवन एवं भंडारा कार्यक्रम में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।