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उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला, मिशन इंद्रधनुष भी नहीं
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फोटो-07एयूआरपी-1 पूराकला में बंद पड़ा उप स्वास्थ्य केंद्र। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। एक तरफ सरकार जहां गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण के लिए मिशन इंद्रधनुष चला रही है, वहीं दूसरी तरफ इनके टीकाकरण के लिए गांवों में खोले गए उपस्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं। किराये के भवनों में खोले गए इन उपस्वास्थ्य केंद्रों में न तो स्टाफ की तैनाती की गई और न ही अन्य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। इस कारण लोगों को इनका लाभ नहीं मिल रहा है।
जिले के हर एक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए शासन स्तर पर जिले के 14 गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे। इनके खोले जाने का मुख्य उद्देश्य गर्भवतियों, बच्चों का टीकाकरण, खून, गर्भावस्था पकी जांच, ब्लडप्रेशर, वजन, आयरन की गोलियों का वितरण, कुपोषित बच्चों का वजन और उपचार के साथ गांव में सामान्य बीमार मरीजों का इलाज था।
सोमवार को मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत हुई, इसके बाद भी इन केंद्रों पर ताला लटकता रहा। अब अधिकारी भी इनके संचालन को लेकर स्टाफ की कमी बता जवाबदेही से बचने लगे हैं। करीब तीन माह पहले चार दिसंबर को मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों का लोकार्पण किया था, तब से स्टाफ की तैनाती नहीं की गई और विभाग भवनों का किराया दे रहा है। शुरुआती दौर में जब यह अस्पताल खोले गए तो गांव के लोगों को पता तक नहीं चला। अब जब अस्पताल खुल गए तो लोगों को तीन माह बीतने के बाद भी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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इन गांवों में खोले गए उप स्वास्थ्य केंद्र
चिरुहलिया, बरौआ, पुरर्वा रामदास, मढ़ादासपुर, पूराकला, पड़रिया, ब्योरानवलपुर, शेखूपुर, जयसिंहपुर, सहसपुर, गाजीपुर, पुर्वाभवानी, बर्रुकुलासपुर।
पूराकला निवासी संतोष बताते हैं कि गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र खुले कई महीने हो गए, लेकिन किसी भी तरह की सेवा का लाभ नहीं मिला है। आज भी हम लोगों को सहार, दिबियापुर स्वास्थ्य केंद्र पर ही जाना पड़ता है।
छोटे सिंह बताते हैं कि गांव में अस्पताल खोले जाने की जानकारी मिली तो उम्मीद जगी थी कि अब इलाज गांव में मिलेगा। मगर जहां अस्पताल खुला है, वहां कोई आता नहीं है। वहां कभी कोई दिखा ही नहीं।
वर्जन...
सभी केंद्रों पर एएनएम की तैनाती की गई है। वर्तमान में उनकी ड्यूटी कोविड टीकाकरण में लगी है। इस कारण पत्र लिखकर शासन से और स्टाफ की मांग की गई है। स्टाफ की कमी दूर होने पर केंद्रों का संचालन किया जाएगा। -डॉ. शिशिर पुरी, एसीएमओ।
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जिले के हर एक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए शासन स्तर पर जिले के 14 गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे। इनके खोले जाने का मुख्य उद्देश्य गर्भवतियों, बच्चों का टीकाकरण, खून, गर्भावस्था पकी जांच, ब्लडप्रेशर, वजन, आयरन की गोलियों का वितरण, कुपोषित बच्चों का वजन और उपचार के साथ गांव में सामान्य बीमार मरीजों का इलाज था।
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सोमवार को मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत हुई, इसके बाद भी इन केंद्रों पर ताला लटकता रहा। अब अधिकारी भी इनके संचालन को लेकर स्टाफ की कमी बता जवाबदेही से बचने लगे हैं। करीब तीन माह पहले चार दिसंबर को मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों का लोकार्पण किया था, तब से स्टाफ की तैनाती नहीं की गई और विभाग भवनों का किराया दे रहा है। शुरुआती दौर में जब यह अस्पताल खोले गए तो गांव के लोगों को पता तक नहीं चला। अब जब अस्पताल खुल गए तो लोगों को तीन माह बीतने के बाद भी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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इन गांवों में खोले गए उप स्वास्थ्य केंद्र
चिरुहलिया, बरौआ, पुरर्वा रामदास, मढ़ादासपुर, पूराकला, पड़रिया, ब्योरानवलपुर, शेखूपुर, जयसिंहपुर, सहसपुर, गाजीपुर, पुर्वाभवानी, बर्रुकुलासपुर।
पूराकला निवासी संतोष बताते हैं कि गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र खुले कई महीने हो गए, लेकिन किसी भी तरह की सेवा का लाभ नहीं मिला है। आज भी हम लोगों को सहार, दिबियापुर स्वास्थ्य केंद्र पर ही जाना पड़ता है।
छोटे सिंह बताते हैं कि गांव में अस्पताल खोले जाने की जानकारी मिली तो उम्मीद जगी थी कि अब इलाज गांव में मिलेगा। मगर जहां अस्पताल खुला है, वहां कोई आता नहीं है। वहां कभी कोई दिखा ही नहीं।
वर्जन...
सभी केंद्रों पर एएनएम की तैनाती की गई है। वर्तमान में उनकी ड्यूटी कोविड टीकाकरण में लगी है। इस कारण पत्र लिखकर शासन से और स्टाफ की मांग की गई है। स्टाफ की कमी दूर होने पर केंद्रों का संचालन किया जाएगा। -डॉ. शिशिर पुरी, एसीएमओ।

फोटो-07एयूआरपी-2- बंद पड़ा पुरवा भवानी का उप स्वास्थ्य केंद्र। संवाद- फोटो : AURAIYA

फोटो-07एयूआरपी-3- संतोष- फोटो : AURAIYA

फोटो-07एयूआरपी-4- छोटे सिंह- फोटो : AURAIYA